टर्नर सिंड्रोम

परिचय
 
टर्नर सिंड्रोम एक अनुवांशिक सिंड्रोम है, जो कि केवल महिलाओं को प्रभावित करती है। यह गुणसूत्र की असामान्यता है, जिसमें लिंग गुणसूत्रों का एक हिस्सा या समस्त भाग अनुपस्थित या अपूर्ण होता हैं (अप्रभावित मनुष्यों में 46 गुणसूत्र हैं, जिनमें से दो यौन गुणसूत्र होते हैं)। 
 
कुछ मामलों में कुछ कोशिकाओं में गुणसूत्र लुप्त हो जाते है लेकिन अन्य में नहीं होते है, इस स्थिति को मोज़ेसिज्म या टर्नर मोज़ेसिज्म के नाम से जाना जाता है।
 
सिंड्रोम के प्रकार:
 
क्लासिक टर्नर सिंड्रोम- जिसमें एक्स गुणसूत्रों में से एक पूरी लुप्त होता है।
 
मोज़ेक टर्नर सिंड्रोम- जिसमें अधिकांश कोशिकाओं में एक्स गुणसूत्र पूर्ण होता है, लेकिन अन्य कोशिकाओं में आंशिक रूप से अनुपस्थित या कुछ कोशिकाओं में असामान्य होता है। जिसमें केवल एक एक्स गुणसूत्र या बेहद कम, दो पूर्ण एक्स गुणसूत्र हो सकते हैं।
 
लिंग गुणसूत्र:
 
आमतौर पर शिशु गुणसूत्रों के 23 जोड़े से पैदा होता हैं। गुणसूत्रों का एक जोड़ा बच्चे का लिंग निर्धारित करता है। इस जोड़े को लिंग (सेक्स) गुणसूत्र के नाम से जाना जाता है। एक लिंग गुणसूत्र पिता से मिलता है तथा दूसरा मां से मिलता है। मां का योगदान हमेशा एक्स गुणसूत्र होता है। पिता का योगदान या तो एक्स या वाई गुणसूत्र हो सकता है। आमतौर पर लड़की में दो एक्स गुणसूत्र (XX) होते हैं तथा लड़कों में एक्स और एक वाई गुणसूत्र (XY) होते है। वाई गुणसूत्र ‘पुरुष (पुल्लिंग)’ का निर्धारण करता है, इसलिए यदि यह अनुपस्थित है, तो टर्नर सिंड्रोम के मामले में बच्चे का लिंग हमेशा लड़की होगा।
 
टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित महिला में एक एक्स गुणसूत्र लुप्त हो जाता है या टूट जाता है। इसका मतलब यह है कि लड़की में दो XX गुणसूत्रों की तुलना में एक पूर्ण X गुणसूत्र होता है।
 
संदर्भ:
 
 
 
 
 

लक्षण 
 
  • छोटा कद।
  • हाथों और पैरों की सूजन (लिम्फोडेमा)।
  • विस्तृत स्थान पर निपल्स के साथ विस्तृत छाती।
  • पीछे छोटा हेयरलाइन।
  • कम छोटे कान।
  • प्रजनन संबंधी बाँझपन।
  • अल्पविकसित अंडाशय।
  • माहवारी (मासिक धर्म चक्रों) की अनुपस्थिति या बंद होना।
  • वज़न बढ़ना, मोटापा।
  • विस्तृत आकार की छाती।
  • छोटे/संकीर्ण नाखून।
  • चेहरे की ख़ास विशेषताएं।
  • महाधमनी का निसंकुचन।
  • बाईसपिपिड महाधमनी वाल्व।
  • ध्यान की कमी/सक्रियता विकार या एडीएचडी (बाल्यवस्था एवं किशोरावस्था में अतिसक्रियता देखी जाने के साथ एकाग्रता, स्मृति, संवेदनशीलता में समस्याएं)।
  • गैर मौखिक सीखने में असमर्थता (गणित, सामाजिक कौशल और अंतरिक्ष-संबंधी के साथ समस्याएं)।
संदर्भ:
 
 

कारण
 
टर्नर सिंड्रोम एक अनुवांशिक सिंड्रोम है, जो कि असामान्य लिंग गुणसूत्रों के कारण होता है। यह केवल महिलाओं को प्रभावित करता है, जिनमें एक्स गुणसूत्र अपूर्ण या अनुपस्थित होता है।
 
संदर्भ:
 

निदान 
 
प्रसवपूर्व परीक्षण:
 
टर्नर सिंड्रोम का पता (निदान) गर्भावस्था के दौरान ऐमीओसेन्टीसिस (गर्भवती महिला के गर्भाशय की जाँच) या कोरियोनिक विमुस नमूनाकरण (शरीर के अन्दर के किसी भाग से बाहर की ओर निकलता अंकुर जैसा महीन छोटा अंश) से किया जा सकता है।
 
अक्सर टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित भ्रूण को अल्ट्रासाउंड के असामान्य (यानी, हृदय दोष, गुर्दे की असामान्यता, सिस्टिक हाइग्रोमा, अस्किट्स) परिणामों से पहचाना जा सकता है। टर्नर सिंड्रोम के बढ़ते ज़ोखिम को असामान्य तिगुने या चौगुने मातृ सीरम स्क्रीन से भी बताया जाता है।
 
सकारात्मक मातृ सीरम स्क्रीनिंग के माध्यम से पता लगाए गए भ्रूण में प्राय: अल्ट्रासोनोग्राफिक के आधार पर पाए जाने वाली असामान्यताओं की तुलना में अधिकांशत: मोज़ेक कार्योटाइप पाया जाता है तथा इसके विपरीत मोज़ेक कार्योटाइप से पीड़ित लोगों में अल्ट्रासाउंड से प्राप्त असामान्यताएं होने की संभावना बेहद कम होती है।
 
प्रसव के बाद:
 
टर्नर सिंड्रोम का पता किसी भी उम्र में प्रसव के बाद लगाया जा सकता है। प्राय: इसका पता जन्म के समय दृदय समस्याओं, असामान्य चौड़ी गर्दन या हाथों और पैरों की सूजन से लगाया जाता है। हालांकि, कई वर्षों तक इस रोग का पता न लग पाना भी सामान्य है। आमतौर पर जब लड़की युवावस्था/किशोरावस्था की आयु तक पहुंचती है और उसमें युवावस्था/किशोरावस्था विकास (युवावस्था से जुड़े परिवर्तन नहीं होते हैं) नहीं होता है, कई बार तब रोग का पता चलता है।  
 
परीक्षण, जिसे कार्योटाइप (क्रोमोसोम्ज़) या गुणसूत्र विश्लेषण कहा जाता है। व्यक्ति की गुणसूत्र संरचना का विश्लेषण करता है। इस परीक्षण का चयन टर्नर सिंड्रोम का पता लगाने के लिए किया जाता है।
 
संदर्भ:
 
 

प्रबंधन
 
टर्नर सिंड्रोम के लिए कोई उपचार नहीं है, लेकिन उससे जुड़े कई लक्षण जैसे कि छोटा कद, यौन समस्याएं और सीखने में कठिनाइयों का उपचार किया जा सकता है। एस्ट्रोजेन रिप्लेसमेंट थेरेपी जैसे कि गर्भ निरोधक गोलियों का उपयोग द्वितीयक यौन (यौवनावस्था/किशोरावस्था के बदलावों) विशेषताओं के विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।
 
एस्ट्रोजेन हड्डियों की बेहतर मज़बूती, कार्डियोवैस्कुलर और ऊतकों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित महिलाएं, जिनमें स्वाभाविक युवावस्था नहीं होती है तथा जिनका उपचार एस्ट्रोजन से नहीं होता है, उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस एवं हृदय समस्याओं से पीड़ित होने का ज़ोखिम अधिक होता हैं।
 
आधुनिक प्रजनन प्रौद्योगिकियों का भी उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए भ्रूण बनाने के लिए दाता के अंडे का उपयोग किया जा सकता है, जिसे टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित महिला से लिया जाता है। 
 
संदर्भ:
 

  • PUBLISHED DATE : Jun 20, 2018
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Jun 20, 2018

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