कापोसी सारकोमा

कापोसी सारकोमा
 
परिचय
 
कपोसी का सारकोमा (केएस) एक प्रकार का कैंसर है, जो कि त्वचा एवं आंतरिक दोनों अंगों को प्रभावित करता है। यह आमतौर पर मानव हर्पीस वायरस-8 के कारण होता है। कपोसी सारकोमा का सबसे सामान्य लक्षण त्वचा पर लाल या बैंगनी घाव/पैच की उपस्थिति है। ‘घाव/पैच’ गांठ में विकसित हो जाते है, जिन्हें नोड्यूल के नाम से जाना जाता हैं। कपोसी सारकोमा एक प्रणालीगत रोग है, जो कि आंतरिक भागीदारी या बिना त्वचीय घावों के साथ होता है।
 
इसके उपप्रकार निम्नलिखित हैं:
 
1) क्लासिक केएस।
 
2) अफ्रीकी स्थानिक केएस।
 
3) चिकित्साजन्य इम्यूनोसप्रेसड रोगी में केएस।
 
4) उपार्जित प्रतिरक्षा न्यूनता (इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस सिंड्रोम/एड्स)- संबंधित केएस।
 
संदर्भ: 
 
 
 

लक्षण
 
ये आमतौर पर त्वचा पर पाए जाते हैं, लेकिन अन्य जगहों पर भी फैल सकते हैं। ये खासतौर पर मुंह, जठरांत्र-नली (गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल ट्रैक्ट) और श्वसन पथ में होते है।
 
त्वचा: आमतौर पर त्वचा के उन हिस्सों, जिसमें हाथ-पैर, पीठ, चेहरा, मुंह और जननांग शामिल हैं, को प्रभावित करता हैं। आमतौर पर घाव प्लेक की तरह होता हैं। संबंधित सूजन या तो स्थानिक सूजन या लिम्फेडिमा (घाव की स्थानिक लिम्फैटिक वाहिकाएं) के रूप में हो सकती है। त्वचा के घाव हल्के विकृत हो सकते है, जिसके कारण मनोवैज्ञानिक रोग हो सकता है।
 
आंतरिक अंग: कपोजी सारकोमा से सबसे अधिक आंतरिक अंग जैसे कि लिम्फ नोड्स, फेफड़े और पाचन तंत्र प्रभावित होता हैं। कपोसी सारकोमा के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं, कि कौन सा अंग प्रभावित हैं। जब लिम्फ नोड्स प्रभावित होता हैं, तो बाहों और पैरों में सूजन हो जाती है, जो कि बेहद दर्दनाक और असहज हो सकती है।
 
संदर्भ: 
 
www.nhs.uk

कारण
 
कपोसी सारकोमा मानव हर्पीस वायरस-8 (एचएचव -8) नामक वायरस के कारण होता है, जिसे कपोसी सारकोमा से जुड़े हर्पीस वायरस (केएसएचवी) के नाम से भी जाना जाता है। वायरस यौन संसर्ग और लार के माध्यम से या जन्म के दौरान मां से बच्चे में संचारित होता है। वायरस से संक्रमित हर व्यक्ति में कपोसी सारकोमा का कारण एचएचवी-8 नहीं होता है। 
 
वायरस केवल निम्न लोगों में कपोसी सारकोमा का कारण होता है:
 
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली।
 
एचएचवी-8 के लिए अतिसंवेदनशीलता (अनुवांशिक)। 
 
संदर्भ: 
 

निदान
 
एचआईवी परीक्षण: एचआईवी के निदान के लिए रक्त परीक्षण।
 
बायोप्सी: कपोसी सारकोमा के निदान की पुष्टि के लिए बायोप्सी सबसे प्रभावी उपाय है। इसमें त्वचा के प्रभावित क्षेत्र से कोशिकाओं का एक छोटा सा नमूना लिया जाता है। कपोसी सारकोमा कोशिकाओं के परीक्षण के लिए उस नमूने की जांच प्रयोगशाला में की जाती है।
 
एंडोस्कोपी: यदि कपोसी सारकोमा पाचन तंत्र में होता है, तो एंडोस्कोपी की जाती है। इसके अंतर्गत गले में एंडोस्कोप नामक एक पतली और लचीली ट्यूब डाली जाती है। यह परीक्षण विशेषज्ञ को कपोसी सारकोमा के संकेतों या किसी भी तरह की असामान्यताओं का पता लगाने लिए आंत्र, यकृत और प्लीहा जैसे पाचन तंत्र के हिस्सों के अंदर देखने में मदद करता है। यदि कुछ संदिग्ध पाया जाता है, तो बायोप्सी की जाती है।
 
कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी): लिम्फ नोड्स या शरीर के अन्य प्रभावित हिस्सों को देखने के लिए की जाती है। 
 
यह सिर्फ संकेतक जानकारी है।
 
निदान और उपचार के लिए आपको अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।
 
संदर्भ: 
 
 

प्रबंधन
 
कपोसी सारकोमा का उपचार निम्नलिखित के आधार पर किया जाता है:
 
लक्षणों की गंभीरता।
 
कपोसी सारकोमा के प्रकार।
 
कैंसर क्लासिक सारकोमा का चरण।
 
क्लासिक कपोसी सारकोमा धीरे-धीरे फैलता है, इसमें तत्काल उपचार की आवश्यकता नहीं होती है तथा 'सतर्क प्रतीक्षा' नीति की सिफ़ारिश की जाती है।
 
स्थानिक अफ्रीकी कपोसी सारकोमा: आमतौर पर इसमें रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी के संयोजन से उपचार किया जाता है।
 
इम्यूनोसप्रेसड रोगी: आमतौर पर इसमें इम्यूनोस्पेप्रेसेंट को न्यून या रोककर उपचार किया जाता है। 
 
एचआईवी संबंधित सारकोमा के लिए: प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करने के लिए अत्यधिक सक्रिय एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एचएएआरटी) के संयोजन का उपयोग किया जाता है।
 
यह सिर्फ संकेतक जानकारी है।
 
निदान और उपचार के लिए आपको अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।
 
संदर्भ: 
 
 

  • PUBLISHED DATE : Oct 03, 2018
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Oct 03, 2018

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