चिंता

“चिंता” अप्रिय भावनात्मक बेचैनी और संकट की स्थिति होती है। आमतौर पर इसे आशंका और चिंता से पहचाना जाता है। व्यक्ति पर चिंता विकार का विनाशकारी प्रभाव हो सकता है। इस रोग के माध्यम से अधिकांश लोग अवसाद में पहुँच जाते हैं।

इस रोग के लिए चेतावनी के संकेत निम्नलिखित हो सकते है:

  • तीव्र भय या आशंका।
  • बेचैनी।
  • आसानी से जल्दी थकना।
  • नींद में परेशानी।
  • वज़न में कमी और भूख में गड़बड़ी।

संदर्भ:

www.nhs.uk

www.cdc.gov

www.nimh.nih.gov

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इस रोग के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल है :

  • थकान।
  • मुँह सूखना।
  • पेट में ऐंठन।
  • सोने में परेशानी और सिरदर्द।
  • मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द होना।
  • निगलने में कठिनाई।
  • कंपन और चिड़चिड़ा महसूस करना।
  • फड़कन।
  • पसीना आना और चेहरा लाल हो जाना।

संदर्भ:

www.nimh.nih.gov

चिंता होने के सही कारण अभी ज्ञात नहीं है।

कुछ शोधकर्ताओं ने यह पाया हैं, कि चिंता विकार निश्चित रसायनों के असंतुलन के कारण उत्पन्न होता है, जो कि मस्तिष्क में मौजूद होते है। इन रसायनों को न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में जाना जाता है।

चिंता विकार के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  • बहुत सारे लोग जीवन में आने वाले परिवर्तन जैसे कि नया काम शुरू करने,शादी करने, बच्चे के पैदा होने के बाद और अपने साथी से संबंध विच्छेद होने पर चिंता से पीड़ित हो जाते हैं।
  • कुछ दवाएं भी चिंता को पैदा कर सकती है। इन दवाओं में अस्थमा के लिए उपयोग किए जाने वाला इनहेलर, थायराइड की दवाएं और आहार की गोलियाँ शामिल हैं।
  • कैफीन, अल्कोहल और तंबाकू उत्पाद भी चिंता को पैदा कर सकता है।

संदर्भ:

www.nhs.uk

इसका निदान संकेत और लक्षणों के आधार पर किया जा सकता है। मनोरोग का मूल्यांकन रोग के निदान में सहायता करता है।

 

 

चिंता का उपचार मनोरोग चिकित्सा और दवाओं या दोनों के साथ भी किया जा सकता है .

मनोरोग चिकित्सा: चिंता के उपचार में मुख्यत: जिस चिकित्सा का उपयोग किया जाता है, उसे संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी कहा जाता है। यह चिकित्सा उपचार में उपयोगी है। यह थेरेपी पुरुष या स्त्री दोनों की चिंताओं और परेशानियों को कम करने में सहायता करती है। यह उन्हें अलग-अलग तरीकों से सोचने, व्यवहार करने और परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया करने में भी सहायता करती है।

दवाएं: चिकित्सक द्वारा प्रस्तावित दवाइयाँ चिंता के उपचार में सहायता पहुँचाती है। इसके लिए एंटी-एंजाईटी दवाएं और एंटीडिप्रेसन्ट दो प्रकार की दवाएं दी जाती है। एंटी-एंजाईटी दवाएं शक्तिशाली होती हैं तथा यह दवाएं अलग-अलग प्रकार की होती हैं। रोग के उपचार में बहुत तरह की दवाएं काम करती हैं, लेकिन ये दवाएं रोगी को लंबी अवधि तक नहीं दी जानी चाहिए।

अवसाद के उपचार में एंटीडिप्रेसन्ट दवाओं का उपयोग किया जाता है, लेकिन यह दवाएं चिंता का उपचार करने में भी सहायता करती हैं। इन दवाओं का प्रभाव शुरू होने में कई सप्ताहों का समय लग सकता हैं। इन दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण सिरदर्द, उल्टी, या सोने में परेशानी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

यह जानना अति महत्वपूर्ण है, कि बहुत सारे व्यक्तियों के लिए एंटीडिप्रेसन्ट दवाएं सुरक्षित और प्रभावी हो सकती है, लेकिन यह दवाएं कुछ व्यक्तियों विशेषकर बच्चों, किशोरों और युवाओं तथा वयस्कों के लिए जोखिमपूर्ण भी हो सकती है। इस प्रकार इन दवाओं का सेवन चिकित्सक द्वारा प्रस्तावित किए जाने के बाद ही किया जाना चाहिए।

संदर्भ :

www.nimh.nih.gov

www.nhs.uk

आजकल की भागदौड़-भरी जिंदगी में, हर व्यक्ति के जीवन में तनाव किसी न किसी रूप में विद्यमान हैं। तनाव से बचने के लिए व्यक्ति को योग, ध्यान, खेल और संगीत जैसी गतिविधियों में लिप्त रहना चाहिए।

इसके अलावा, व्यक्ति को खाली समय में अपने कुछ शौकों को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।

  • PUBLISHED DATE : Dec 10, 2015
  • PUBLISHED BY : Zahid
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Dec 10, 2015

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