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चिकनगुनिया बुखार

हालाँकि चिकनगुनिया बुख़ार से दौर्बल्य होता है, परंतु यह अघातक वायरल बीमारी है। यह रोग संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। एडीज मच्छर साफ़ इकठ्ठा पानी में प्रजनन करती है। यह मच्छर पानी के कंटेनर्स, टंकियों और बेकार खाली पड़े टायरों जैसे कि बाल्टियों, बर्तनों, टायर्स और फूलदान में प्रजनन करती हैं। आमतौर पर एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने का मुख्य समय सुबह अथवा देर शाम होता है। चिकनगुनिया बुख़ार टोगाविरिडी परिवार के जीनस अल्‍फावायरस वायरस के कारण होता है। इस बीमारी का उपचार लक्षणों और शरीर पर दिखने वाले लक्षणों (जोड़ों की सूजन), प्रयोगशाला परीक्षण और संक्रमित मच्छरों के जोखिम के संपर्क में आने के आधार पर किया जाता है। चिकनगुनिया बुखार का कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। इस रोग का उपचार मुख्य रूप से लक्षणों को कम करने में सहायता करता है।

संदर्भ:

www.who.int

www.nvbdcp.gov.in

www.cdc.gov

www.icmr.nic.in

इस मॉड्यूल की सामग्री, डॉ. इंदु ग्रेवाल, केन्द्रीय स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो, नई दिल्ली द्वारा दिनांक ३ नवंबर २०१४ को प्रमाणित की गई है।

आमतौर पर, इस बीमारी को जोड़ों के दर्द के साथ अचानक बुख़ार और कँपकँपी शुरू होने से जाना जाता है। इसके अन्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • मांसपेशियों में दर्द।
  • थकान और मतली।
  • सिरदर्द।
  • चकत्ते/दाने।
  • अक्सर जोड़ों का दर्द बहुत दौर्बल्य होता है, लेकिन आमतौर पर यह कुछ दिनों या हफ्तों के भीतर समाप्त हो जाता है।

संदर्भ:

www.cdc.gov

चिकनगुनिया वायरस संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। मच्छर चिकनगुनिया वायरस से पीड़ित व्यक्ति को काटने पर स्वयं संक्रमित हो जाता है। इनकी ऊष्मायन अवधि (बीमारी के संक्रमण का समय) का समय दो से बारह दिनों का होता है, लेकिन आमतौर पर यह तीन से सात दिनों का भी हो सकता है। चिकनगुनिया के वायरस को "साइलेंट" संक्रमण (बीमारी के बिना संक्रमण) के रूप में पाया जाता है, तथापि ऐसा बहुत कम स्थितियों में होता है।

संदर्भ:

www.nvbdcp.gov.in

www.cdc.gov

चिकनगुनिया और डेंगू दोनों की नैदानिक स्थितियां एक समान होती है, इसलिए, विशेषत: डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में प्रयोगशाला पुष्टि अति महत्वपूर्ण होती है। चिकनगुनिया- एंजाइम लिंक्ड इम्यूनो- सोरबेंट अर्से (एलिसा) में आईजीएम और आईजीजी– एंटीजन/एंटीबॉडी की उपस्थिति की पुष्टि हो सकती है।

विभिन्न रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस-पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (आरटी पीसीआर) उपाय भी उपलब्ध है, लेकिन उनमें परिवर्तनीय संवेदनशीलता होती हैं। नैदानिक नमूनों से प्राप्त आरटी-पीसीआर उत्पादों का उपयोग वायरस की जीनोटाइपिंग के लिए भी किया जा सकता है, जो कि विभिन्न भौगोलिक स्रोतों से लिये गए वायरस के नमूने के साथ तुलना की अनुमति देते है।

संदर्भ:

www.who.int

www.icmr.nic.in

चिकनगुनिया का कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। सहायक उपचार केवल लक्षणों को कम करने के लिए दिया जाता है।

  • दर्द से राहत में स्‍टेरॉइड रहित एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं सहायता करती है।
  • एंटीवायरल दवाएं जैसे कि ऐसीक्लोविर (लेकिन यह केवल जटिल मामलों में चिकित्सक द्वारा निर्धारित करने पर ही दी जा सकती हैं) दी जाती है।
  • तरल पदार्थों का सेवन: अधिक से अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।
  • संक्रमित व्यक्तियों को जितनी जल्दी संभव हो सकें उतनी जल्दी मच्छरों और दूसरे व्यक्तियों को संक्रमित करने के ख़तरे के कारण अलग रखा जाना चाहिए।

संदर्भ:

www.who.int

चिकनगुनिया संक्रमण का उपचार करने के लिए चिकनगुनिया वायरस का टीका उपलब्ध नहीं है तथा चिकनगुनिया की दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। मच्छर के काटने से बचना ही चिकनगुनिया की रोकथाम ही कुँजी है। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना रोकथाम की अन्य महत्वपूर्ण कुँजी है। चिकनगुनिया की रोकथाम मच्छरों द्वारा प्रसारित होने वाली अन्य वायरल संक्रामक बीमारियों जैसे कि डेगू के समान होती है।

  • कीट दूर भागने वाले उत्पादों जैसे कि डीईईटी, पिक्काडीन का उपयोग करें तथा त्वचा पर यूकेलिप्टस नींबू का तेल लगाएं।
  • हमेशा पैकेज पर लिखे निर्देशों का पालन करें।
  • लंबी बाजू के कपड़े और पैंट पहनें (कपड़ों को पर्मेथ्रिन या कीट दूर भागने वाले उत्पादों से उपचारित किया जाना चाहिए)।
  • मच्छरों को अंदर आने से रोकने के लिए खिड़कियों और दरवाजों पर स्क्रीन लगाएं।
  • इसके अतिरिक्त, चिकनगुनिया बुख़ार से पीड़ित व्यक्ति को संक्रमण के प्रसार से बचने के लिए मच्छरों के काटने के जोखिम को सीमित करना चाहिए।
  • व्यक्ति को बाहर जाते समय मच्छरों के काटने से बचने के लिए मच्छर भगाने वाले उत्पादों का उपयोग करना चाहिए या मच्छरों को घर के अंदर आने से रोकने के लिए मच्छरदानी अथवा स्क्रीन का उपयोग करना चाहिए।

संदर्भ:

www.cdc.gov

  • PUBLISHED DATE : May 19, 2015
  • PUBLISHED BY : NHP CC DC
  • CREATED / VALIDATED BY : NHP Admin
  • LAST UPDATED ON : Dec 17, 2015

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