अस्थिभंग (हड्डी टूटना)

अस्थिभंग (हड्डी टूटना)
 
परिचय
 
अस्थिभंग एक चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें हड्डी की निरंतरता में चोट और रोगजनक (पैथोजनिक) फैक्चर-हड्डी टूटने की कुछ चिकित्सीय परिस्थिति जैसे कि अस्थि-सुषिरता (ऑस्टियोपोरोसिस), अस्थि कैंसर या अस्थिजनन अपूर्णता (ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा) के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती है तथा मामूली आघात या थोड़ी-सी चोट लगने से टूट जाती है। 
 
वर्गीकरण:
 
कारण:
 
ट्रॉमैटिक फ्रैक्चर (आघात अस्थिभंग)- यह आघात के कारण होने वाला अस्थिभंग है। यह गिरना, सड़क यातायात दुर्घटना, लड़ाई और कई अन्य के कारण होता है।
 
पैथोलाजिकल फ्रैक्चर (रोगजनक अस्थिभंग)- कुछ रोगों के कारण होने वाला अस्थिभंग है, जो कि हड्डी को कमजोर बनाता है, जिसे पैथोलॉजिकल फ्रैक्चर के नाम से जाना जाता है, जैसे कि मेटास्टेसिस द्वारा कमजोर हड्डी के माध्यम से अस्थिभंग। ऑस्टियोपोरोसिस पैथोलॉजिकल अस्थिभंग का सबसे सामान्य कारण है।
 
सभी अस्थिभंग को व्यापक स्तर पर इस प्रकार बताया जा सकता है:
 
क्लोज फ्रैक्चर (बंद (साधारण) अस्थिभंग)- जब हड्डी टूट जाए लेकिन ऊपर की त्वचा ज्यों की त्यों रहें, तब उसे क्लोज फ्रैक्चर (बंद (साधारण) अस्थिभंग) कहा जाता है। 
 
 
ओपन (कंपाउंड) फ्रैक्चर (विवृत्त अस्थिभंग)- इसमें घाव शामिल है, जो कि अस्थिभंग के साथ जुड़ा हैं तथा इस प्रकार बाहर निकली (उजागर) हड्डी संदूषण कर सकती हैं। खुली चोट से संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। 
 
अन्य प्रकार के अस्थिभंग इस प्रकार हैं:
 
कम्प्लीट फ्रैक्चर (विखंडित/पूर्ण अस्थिभंग)- अस्थिभंग, जिसमें हड्डी के टुकड़े पूरी तरह से अलग हो जाते हैं।
 
इन्कम्प्लीट फ्रैक्चर (अपूर्ण अस्थिभंग)- अस्थिभंग, जिसमें हड्डी के टुकड़े आंशिक रूप से जुड़े रहते है। कुछ मामलों में हड्डी वाले ऊतकों में दरार आ जाती है या टूट जाते है, जिसमें अस्थिभंग-रेखा पूरी हड्डी को पार नहीं करती है। इसे अपूर्ण अस्थिभंग कहा जाता है।
 
लिनीअर फ्रैक्चर (रैखिक अस्थिभंग)- अस्थिभंग, जो कि हड्डी के लंबे अक्ष के समानांतर है।
 
ट्रांसवर्स फ्रैक्चर- अस्थिभंग, जिसमें अस्थिभंग रेखा हड्डी के लंबे अक्ष के समकोण पर होती है।
 
अब्लीक फ्रैक्चर (तिर्यक अस्थिभंग)- अस्थिभंग, जिसमें अस्थिभंग रेखा हड्डी के लंबे अक्ष को तिरछा करती है।
 
सर्पिल फ्रैक्चर/स्पायरल फ्रैक्चर- अस्थिभंग, जिसमें हड्डी का कम से कम एक हिस्सा मुड़ जाता है।
 
कॉमिन्यूटेड फ्रैक्चर (बहुखंड अस्थिभंग)- अस्थिभंग, जिसमें हड्डी के टुकड़े-टुकड़े हो जाते है। 
 
इंपेक्टेड फ्रैक्चर (पच्चड़ी अस्थिभंग)- अस्थिभंग, जिसमें हड्डी का एक टुकड़ा दूसरे में धंस जाता है।
 
एवल्शन फ्रैक्चर- यह अस्थिभंग तब होता है, जब किसी हड्डी के खींचे जाने से हड्डी से जुड़े टेंडन्स और लिगामेंट्स (हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ने वाला नरम ऊतक) हड्डी से अलग हो जाए या उनमें टूट-फुट हो जाए।
 
संदर्भ:
 

लक्षण
 
अस्थिभंग के कारण निम्नलिखित हो सकता है:
 
दर्द और रक्तस्राव।
 
सूजन।
 
प्रभावित हिस्से के आसपास की त्वचा में बदलाव या खरोंच।
 
रोगी चोट लगे हिस्से पर वजन डालने में असमर्थ होता है।
 
रोगी प्रभावित हिस्से को हिला नहीं पाता है।
 
यदि अस्थिभंग खुला है तो निम्नलिखित होने की संभावना हो सकती है
 
रक्तस्राव
 
निकटवर्ती संरचनाएं जैसे कि तंत्रिकाएं या वाहिकाएं, मेरुरज्जु और तंत्रिका के मूल (मेरूदण्ड अस्थिभंग) या कपाल सामग्री (खोपड़ी अस्थिभंग) की क्षति के कारण अन्य विशिष्ट संकेत और लक्षण हो सकते हैं।
 
 
संदर्भ:
 

कारण
 
अस्थिभंग का सामान्यत: कारण अत्यधिक दबाव या सड़क दुर्घटना से गिरना हैं।
 
स्वस्थ हड्डियां अत्यंत मज़बूत और लचीली होती हैं तथा शक्तिशाली प्रभावों का सामना कर सकती हैं। जब लोग बुढ़ापे में प्रवेश करते हैं, तब दो कारक अस्थिभंग के जोखिम को अधिक बढ़ा देते हैं; कमजोर हड्डी और गिरने का ज़ोखिम। वयस्कों की तुलना में बच्चे शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय होते हैं, इस प्रकार वे दुर्घटनाओं या गिरने का शिकार अधिक होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अस्थिभंग हो सकता है। दुर्बल रोग से पीड़ित और परिस्थितियां, जो कि व्यक्ति की हड्डियों को कमजोर करती है, उनसे भी अस्थिभंग का जोखिम अधिक होता है। उदाहरण में ऑस्टियोपोरोसिस, संक्रमण या ट्यूमर शामिल हैं।
 
संदर्भ:
 

निदान
 
अस्थिभंग (हड्डी टूटना) का निदान चिकित्सकीय इतिहास और रोगी के शारीरिक परीक्षण के आधार पर किया जाता है।
 
अस्थि-भंग के संदेह में हड्डी देखने के लिए अक्सर एक्स-रे द्वारा चित्र/इमेजिंग की जाती है।
 
कुछ परिस्थितियों में केवल एक्स-रे पर्याप्त नहीं है, टोमोग्राफ (सीटी स्कैन) या एमआरआई का की जाती है।
 
संदर्भ:
 

जटिलताएं
 
कुसम्मिलन (गलत जगह में जुड़ना)- यह तब होता है, जब अस्थिभंग गलत स्थिति में ठीक हो जाता है या यह स्थानांतरित (अस्थिभंग अपने आप ही खिसक जाता है) हो जाता है।
 
हड्डी का विकास रुकना- यदि बचपन के दौरान अस्थिभंग हड्डियों के दोनों सिरों को प्रभावित करता है (हड्डी गलत जुड़ जाती है या जहां है वहीं जुड़ जाती है), तो हड्डी का सामान्य विकास प्रभावित होने का जोखिम होता है तथा बाद में विकृति का खतरा बढ़ जाता है।
 
निरंतर अस्थि या अस्थि मज्जा में संक्रमण- यदि अस्थिभंग के कारण त्वचा में घाव हो जाता है, तो घाव के माध्यम से बैक्टीरिया हड्डी या अस्थि मज्जा के अंदर घुस सकता है, जिससे निरंतर संक्रमण (ऑस्टियोमाइलाइटिस) हो सकता है।  रोगी को अस्पताल में भर्ती होने और एंटीबायोटिक दवाओं से उपचार की आवश्यकता हो सकती है। कभी-कभी सर्जिकल ड्रेनेज (शल्य चिकित्सा अपवाह) और क्युरेटिज (खरोंचना) की आवश्यकता होती है।
 
हड्डी का मृत होना (एवैस्कुलर नेकरोसिस)- यदि हड्डी के ऊत्तकों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंचता है, तो हड्डी के ऊत्तक मरने लगते है।
 
संदर्भ:
 

रोकथाम
 
पोषण और धूप- मानव शरीर को स्वस्थ हड्डियों के लिए पर्याप्त कैल्शियम आपूर्ति की आवश्यकता होती है। दूध, पनीर, दही और गहरी हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए हमारे शरीर को विटामिन डी की भी आवश्यकता होती है। सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने के साथ-साथ अंडे और विभिन्न प्रकार का मछली उपभोग विटामिन डी प्राप्त करने का बेहतर तरीका हैं।
 
शारीरिक गतिविधि- व्यक्ति जितना अधिक वजन उठाने वाले (भारवाही) व्यायाम करता है, उसकी हड्डियां उतनी ही अधिक मज़बूत और सघन बनती है। उदाहरण के लिए रस्सी कूदना, चलना, दौड़ना और नृत्य, तथा अन्य व्यायाम, जिसमें शरीर के कंकाल में खिंचाव बढ़ता है। वृद्धावस्था में न केवल कमजोर हड्डियां होती हैं, बल्कि अक्सर कम शारीरिक गतिविधि होती है, जिससे हड्डियों के कमजोर होने का जोखिम बढ़ाता है। सभी उम्र के लोगों के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय रहना महत्वपूर्ण है।
 
रजोनिवृत्ति (महिलाओं में)- हार्मोन एस्ट्रोजन, जो कि एक महिला के कैल्शियम को नियंत्रित करता है। एस्ट्रोजन कम होना शुरू होता है और रजोनिवृत्ति के बाद तक जारी रहता है। दूसरे शब्दों में रजोनिवृत्ति के बाद कैल्शियम नियंत्रण अधिक कठिन हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप महिलाओं को रजोनिवृत्ति के दौरान और बाद में उनकी हड्डियों की सघनता और मज़बूती के बारे में विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता होती है।
 
संदर्भ:
 
 

उपचार
 
क्लोज़ फ्रैक्चर (बंद (साधारण)अस्थिभंग) एनेस्थीसिया के साथ या उसके बिना उपचारित हो जाता है और फिर ठीक हो जाता है। अस्थिभंग उपचार को मोटेतौर पर सर्जिकल या संरक्षणवादी उपचार के रूप में वर्गीकृत किया जाता है:
 
‘संरक्षणवादी पद्धति’ किसी भी गैर-सर्जिकल प्रक्रिया जैसे कि दर्द प्रबंधन, स्थिरीकरण या अन्य गैर-सर्जिकल स्थिरीकरण के लिए प्रस्तावित की जाती है।
 
‘संरक्षणवादी पद्धति’ अस्थिभंग उपचार सामान्यत: यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जाता है कि उपचार के बाद चोट वाला हिस्सा संभवत सबसे बेहतर कार्य करेगा। 
उपचार चोट वाली हड्डी को सबसे बेहतर तरीके से ठीक होने के लिए सबसे अच्छी परिस्थितियों प्रदान करने पर भी केंद्रित है।
 
कास्ट स्थिरीकरण- अस्थिभंग के बाद, यह कम हो जाता है यानि उपचारित करते समय हड्डी को ठीक तरीके से जुड़ने तक उसी दशा में रखा जाता है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
 
प्लास्टर कास्ट या प्लास्टर फंक्शनल ब्रेसिज़- ये हड्डी को उसी दशा में बनाए रखता हैं, जब तक वह जुड़ नहीं जाती है। इन दिनों पोरस कास्ट का उपयोग किया जाता है। पोरस कास्ट को लगाना आसान होता है तथा यह असुविधाजनक नहीं होता हैं।
 
धातु की प्लेट व पेंच- वर्तमान प्रक्रियाएं न्यूनतम आक्रामक तकनीकों का उपयोग करती है। 
 
इंट्रा-मेड्युलरी नेल- आंतरिक धातु की छड़ी को लंबी हड्डियों के बीच में डाला जाता है और बच्चों में लचीले तारों का उपयोग किया जाता है।
 
बाहरी स्थिरता (इक्स्टर्नल फिक्सेटर्स)- ये धातु या कार्बन तंतु से बने हो सकते हैं; उनमे स्टील के पिन होते हैं, जो कि त्वचा के माध्यम से सीधे हड्डी में जाते हैं। ये शरीर के बाहर एक प्रकार का मचान हैं। आमतौर पर अस्थिभंग/ टूटी हड्डी व उसके आसपास के क्षेत्र का दो से आठ सप्ताह तक स्थिरीकरण कर दिया जाता है। स्थिरीकरण की अवधि इस पर निर्भर करती है कि कौन सी हड्डी में प्रभावित है या फिर कुछ जटिलताएं जैसे कि रक्त की आपूर्ति में समस्या या संक्रमण है।
 
दर्द प्रबंधन- दर्द निवारक जैसे कि इबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक का उपयोग दर्द से राहत दिलाने के लिए किया जाता है।
 
फिजियोथेरेपी- एक बार हड्डी जुड़ने के बाद मांसपेशियों की मजबूती और प्रभावित जगह की गतिशीलता को फिर से बहाल करना आवश्यक है। यदि अस्थिभंग किसी जोड़ में या उसके आसपास हुआ है, तो इसमें स्थायी रूप से जकड़न का जोखिम हो सकता है- ऐसे में व्यक्ति अपने जोड़ को पहले की तरह मोड़ने में असक्षम हो सकता है। 
 
सर्जरी- यदि प्रभावित हड्डी या जोड़ के आसपास की त्वचा या नरम ऊतक को नुकसान पहुंचा है, तो प्लास्टिक सर्जरी की ज़रूरत हो सकती है।
 
बोन ग्राफ्टिंग- बोन ग्राफ्टिंग एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें अस्थिभंग को ठीक करने के लिए लुप्त हड्डी की जगह पर अन्य हड्डी को लगा दिया जाता है। यह बेहद जटिल प्रक्रिया है। पूरी तरह से ठीक होने में रोगी को एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है या यह विफल भी हो सकती है।
 
 
संदर्भ:
 

  • PUBLISHED DATE : Sep 24, 2019
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Sep 24, 2019

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