विसूचिका/हैजा

परिचय 
 
विसूचिका/हैजा व्यक्ति द्वारा दूषित भोजन या पानी पीने के कारण होने वाला आँत संबंधी संक्रामक रोग है। आमतौर पर, यह विब्रियो कोलरा बैक्टीरिया के कारण होता है। इसकी ऊष्मायन अवधि एक से पांच दिनों की होती है। संदूषण के बाद, जीवाणु आंत्रजीवविष पैदा करता है, जिसके कारण प्रचुर, पीड़ादायक और पतले दस्त होते है। यह जल्दी गंभीर निर्जलीकरण को उत्पन्न करता है। यदि रोगी को समय पर, तुरंत उपचार प्रदान नहीं किया जाता है, तो रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। 
 
इसके अलावा ज़्यादातर रोगियों को उल्टी भी होती है। आमतौर पर, हैजा के बैक्टीरिया को पानी या भोजन के स्रोतों में देखा जाता है। इस रोग का बैक्टीरिया पीड़ित संक्रमित व्यक्ति के मल द्वारा भी संचारित हो सकता है। आमतौर पर, हैजा को अपर्याप्त पानी की सुविधा, अस्वच्छता और अपर्याप्त सफाई के साथ कई स्थानों पर पाया जाता है।
हैजा का जीवाणु खारी नदियों और तटीय जल के वातावरण में भी पनप सकता है।
 
संदर्भ:
 
 
इस मॉड्यूल की सामग्री, डॉ. दीपक राउत, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली द्वारा दिनांक ३० नवंबर २०१४ को प्रमाणित की गई है।

लक्षण 
 
हैजा का संक्रमण प्रायः हल्का या लक्षण रहित होता है, लेकिन कभी-कभी, यह संक्रमण गंभीर हो सकता है।
 
संक्रमित व्यक्ति में हैजा के गंभीर लक्षण निम्नलिखित हो सकते है:
 
  • अत्यधिक पानी वाले दस्त। 
  • उल्टी। 
  • पैरों में ऐंठन।
 
व्यक्ति के शरीर में तेज़ी से तरल पदार्थों का नुकसान होता है, जो कि निर्जलीकरण और आघात को पैदा करता है। यदि रोगी को तत्काल उपचार प्रदान नहीं किया जाता है, तो घंटे के भीतर रोगी की मृत्यु हो सकती है।  
 
संदर्भ:
 

कारण
 
हैजा दस्त/अतिसार/डायरिया वाला रोग है, जो कि विब्रियो कोलरा बैक्टीरिया के कारण होता है। यह प्रजाति मनुष्य के लिए सामान्य नहीं है। मानव पाचन तंत्र में, बैक्टीरिया की उपस्थिति उसके मूल जीवन चक्र का स्वाभाविक हिस्सा नहीं है।
 
हैजा के बैक्टीरिया व्यक्ति में दूषित भोजन खाने या पानी पीने के माध्यम से संक्रमित हो सकता है। आमतौर पर, इस महामारी के संदूषण का प्रमुख स्रोत् संक्रमित व्यक्ति का मल होता है। जब मक्खियाँ मल पर बैठती है, तब मक्खियों के पैरों की गद्दी में बैक्टीरिया चिपक जाते है। जब ये मक्खियाँ खाने की वस्तुओं पर बैठती हैं, तब बैक्टीरिया आहार में पहुँच जाता है। यह बैक्टीरिया दूषित आहार के माध्यम से व्यक्ति में संचारित हो जाता है। यह रोग सीवेज की अपर्याप्त सुविधा और अनुचित पीने के पानी की व्यवस्था वाले क्षेत्रों में तेज़ी से संचारित होता है।
 
यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलती है बल्कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बीमार होने का कोई खतरा नहीं होता है।
 
संदर्भ:
 

निदान
 
प्रयोगशाला परीक्षणों में, मल ग्रैम स्टेन (ग्रैम नेगेटिव राड) कल्चर, डार्क फ़ील्ड माइक्रोंस्कपी या मल पीसीआर शामिल हैं। नैदानिक परीक्षण की पुष्टि से पहले ही, उपचार शुरू करना आवश्यक होता है। 
 
मल या रेक्टल स्वाब का नमूना लिया जाता है तथा इसे हैजा बैक्टीरिया परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है।
 
हैजा कॉट: इस कॉट के नीचे लगी बाल्टी में मल गिरता है। इस कॉट का उपयोग रोगी द्वारा मल की उत्सर्जित मात्रा और नष्ट हुई द्रव की मात्रा को पूरा करने के लिए किया जाता है।
 
संदर्भ:
 

प्रबंधन 
 
अधिक से अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें: निर्जलीकरण से बचने के लिए अधिक से अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना आवश्यक होता है। निर्जलीकरण को रोकने ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट (ओआरएस) का उपयोग किया जाता है। मानक घरेलू नुस्खे जैसे कि नमकीन चावल का पानी (नमकीन मांड), नमकीन दही पेय, सब्जी और चिकन के सूप का सेवन भी किया जा सकता है। रोगी को घरेलू नुस्खे जैसे कि दाल का पानी, हरे नारियल का पानी, नमक रहित सूप, हल्की चाय (मीठे के बिना) और मीठा रहित ताज़ा फलों का रस सेवन के लिए दिया जा सकता है। 
 
दवाएं:
 
एंटीबायोटिक्स बीमारी की गंभीरता और अवधि को कम कर सकता है, लेकिन इस दवा का उपयोग पुनर्जलीकरण प्राप्त करने में सहायता नहीं होता है।
 
आहार:
 
डब्ल्यूएचओ द्वारा दस्त/अतिसार/डायरिया से पीड़ित बच्चे को लगातार खिलाए जाने की सिफ़ारिश की जाती है। सामान्य आँत की प्रक्रिया को पुनः प्राप्त करने के लिए लगातार खिलाने से सहायता मिलती है। इसके विपरीत, यदि लंबी अवधि तक दस्त/अतिसार/डायरिया से पीड़ित बच्चे को आहार का सेवन प्रतिबंधित होता है, तो उन बच्चों में आँत की सामान्य प्रक्रिया को पुनः प्राप्त करने की गति मंद हो जाती है। 
 
संदर्भ:
 

 

रोकथाम 
 
हैजा की रोकथाम के लिए सुझाव:
 
  • स्वच्छ और सुरक्षित पीने पीएं।
  • अक्सर अपने हाथ साबुन और साफ़ पानी से धोएं। 
  • प्रर्याप्त स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई को बनाए रखें। 
  • आहार को उचित तरीके और पूरी तरह से ढ़ंककर पकाएं।
 
इन दिनों दो ओरल हैजा वैक्सीन उपलब्ध हैं। ड्यूकोरल (एसबीएल वैक्सीन द्वारा निर्मित), जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पूर्व अर्हता और साठ से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त है तथा शैनकोल  (भारत में शांता बायोटेक द्वारा निर्मित), जो कि भारत में लाइसेंस प्राप्त और डब्ल्यूएचओ से अर्हता प्राप्त करने के लिए लंबित है, क्योंकि वैक्सीन की दो खुराक है, वैक्सीन लेने वाले व्यक्तियों को सुरक्षा प्राप्ति में कई सप्ताहों का समय लग सकता है, इसलिए, टीकाकरण को हैजा की रोकथाम और नियंत्रण के मानक उपायों के साथ बदला नहीं जाना चाहिए।
 
संदर्भ:
 

  • PUBLISHED DATE : Mar 09, 2016
  • PUBLISHED BY : Zahid
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Mar 09, 2016

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