कृमिरोग (मृदा-संचारित कृमि संक्रमण)

कृमिरोग (मृदा-संचारित कृमि संक्रमण)
 
परिचय
 
मृदा संचारित कृमि संक्रमण (एसटीएच) कृमि संक्रमण के समूह के भीतर एक उप-समूह है। यह विशेषत: उन कृमियों (कीड़ों) के कारण होता है, जो कि मल से दूषित मृदा के माध्यम से संचारित होते है, इसलिए इन्हें मृदा-संचारित कृमि (आंत्र परजीवी) संक्रमण कहा जाता है।
 
मृदा-संचारित कृमि संक्रमण (एसटीएच) उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय देशों में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो कि अत्यधिक गरीब और वंचित समुदायों को प्रभावित करती है। पूरे विश्व में मृदा-संचारित कृमि संक्रमण से 1.5 अरब से अधिक लोग  या विश्व की 24% जनसंख्या संक्रमित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है, कि भारत में एक से चौदह वर्ष की आयु वर्ग के 241 मिलियन बच्चों को परजीवी आंतों के कृमि संक्रमण का ज़ोखिम होता है। एसटीएच संक्रमण मानव मल में उपस्थित जीवाणुओं के अंडों से संचारित होता हैं, जहां स्वच्छता खराब होती है, ये उन क्षेत्रों की मिट्टी को दूषित करते हैं ।
 
संदर्भ:
 
 
 

लक्षण 
 
हल्के संक्रमण से पीड़ित लोगों में सामान्यत: कोई लक्षण नहीं होता है।
 
अत्यधिक संक्रमण के कारण दस्त और पेट दर्द, सामान्य अस्वस्थता और कमजोरी तथा दुर्बल संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास होता है।
 
अंकुश कृमि या हुकवर्म के कारण क्रोनिक आंतों में रक्त की क्षति हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप एनीमिया हो सकता है।
 
पौष्टिक स्थिति पर प्रभाव-
 
  • मृदा-संचारित कृमि उन लोगों की पोषण स्थिति को विकृत करता हैं, जो कि कई तरीकों से संक्रमित होते हैं।
  • कृमि रक्त के साथ-साथ ऊतकों को खाते हैं, जिससे आयरन और प्रोटीन की क्षति होती है।
  • कीड़े पोषक तत्वों के विकृत अवशोषण (पाचन तंत्र से पोषक तत्वों का असामान्य अवशोषण) में वृद्धि करते है। इसके अलावा, गोलकृमि (राउंडवार्म) संभवतः आंत में विटामिन ए के लिए मुकाबला करता है।
मृदा-संचारित कृमि के कारण भूख में कमी भी उत्पन्न हो जाती है तथा इसके परिणामस्वरूप पोषण के सेवन और शारीरिक तंदुरूस्ती में कमी होती है। विशेषकर टी. ट्रिकियूरा के कारण दस्त और खसरा हो सकता है।
 
पोषक तत्व संबंधी नुकसान का कारण मृदा-संचारित कृमि संक्रमण है, जिसे बढ़ोत्तरी और शारीरिक विकास पर होने वाले महत्वपूर्ण प्रभाव से पहचाना जाता है।
 
संदर्भ:
 

कारण
 
लोगों को संक्रमित करने वाली मुख्य प्रजातियां गोलकृमि (ऐसकैरिस लंब्रिकॉयडीज़), ह्विपवर्म (ट्रिक्यूरिस ट्रिकियूरा), और हुकवार्म (निकेटर अमरीकनस) और (ऐन्सिलॉस्टोमा ड्यूओडीनेल) हैं।
 
संचारण: मृदा-संचारित कृमि संक्रमण, संक्रमण से पीड़ित लोगों के मल में पारित जीवाणुओं के अंडों से संचारित होता हैं। वयस्क कीड़े आंत में रहते हैं, जहां वे प्रतिदिन हजारों अंडे उत्पन्न करते हैं। उन क्षेत्रों में जहां पर्याप्त स्वच्छता की कमी है, इन जीवाणु के अंडे मिट्टी को दूषित करते हैं।
 
संचारण कई तरीकों से हो सकता है:
 
1. जब सब्जियों को सावधानी से पकाया, धोया या छीला नहीं जाता है और उनमें होने वाले होने वाले जीवाणुओं के अंडों को खा लिया जाता है, तब कृमि का संचारण होता है; 
 
2. जीवाणुओं के अंडों का सेवन दूषित जल स्रोतों से भी होता हैं।
 
3. जीवाणु के अंडे का सेवन उन बच्चों द्वारा होता हैं, जो कि मिट्टी में खेलते हैं और फिर हाथ धोएं बिना अपना हाथ मुंह में डाल लेते हैं।
 
इसके अलावा, मृदा में हुकवार्म अंडे से मिट्टी में लार्वा निकलता हैं, हुकवार्म के रूप में परिपक्व होकर त्वचा के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। लोग हुकवार्म से मुख्यत: दूषित मिट्टी पर नंगे पैर चलने से संक्रमित होते हैं।
 
व्यक्ति-से-व्यक्ति में प्रत्यक्ष संचारण नहीं होता है या तत्काल उत्सर्जित मल से संक्रमण नहीं होता है, क्योंकि मल में पारित जीवाणुओं के अंडों को रोगजनक बनने से पहले मिट्टी में परिपक्व होने के लिए तीन सप्ताहों की आवश्यकता होती है।
 
चूंकि ये कृमि मानव के भीतर संख्या में नहीं बढ़ते हैं, इसलिए पुन:संक्रमण पर्यावरण में उपस्थित रोगजनक चरण में कृमि के संपर्क में आने के परिणामस्वरुप होता है।
 
संदर्भ:
 
 
 

निदान
 
एसटीएच का निदान जीवाणुओं के अंडों की उपस्थिति के लिए माइक्रोस्कोप का उपयोग करके मल के नमूने की जांच से किया जाता है।
 
विकासशील देशों में मृदा-संचारित कृमि संक्रमण के उच्च ज़ोखिम से पीड़ित समूहों का उपचार अक्सर पूर्व मल परीक्षण के बिना किया जाता है। इस तरह के उपचार को निवारक उपचार कहा जाता है।
 
कुछ लोगों को संक्रमण तब दिखाई देता है, जब उनके मल या खांसी में कृमि निकलता है। यदि ऐसा होता है, तो निदान के लिए स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता के पास कृमि नमूना लेकर जाएं।
 
संदर्भ:
 
 

प्रबंधन
 
कृमि का उपचार करने के लिए कृमिनाशक दवाओं (दवाएं, जो कि कृमि को बाहर निकालती है) का उपयोग किया जाता है।
 
डब्ल्यूएचओ स्थानिक क्षेत्रों (जनसंख्या में रोग की निरंतर उपस्थिति) में रहने वाले सभी ज़ोखिम से पीड़ित लोगों को पूर्व व्यक्तिगत निदान के बिना कृमिनाशक (कीड़ों से मुक्त होना/कृमिहरण) दवाएं समय-समय पर दिए जाने वाले उपचार करने की सिफ़ारिश करता है। जब समुदाय में मृदा-संचारित कृमि संक्रमण का प्रसार बीस प्रतिशत से अधिक हों, तब वर्ष में एक बार उपचार दिया जाना चाहिए तथा जब समुदाय में मृदा-संचारित कृमि संक्रमण का प्रसार पचास प्रतिशत से अधिक हों, तब वर्ष में दो बार उपचार दिया जाना चाहिए।
 
संदर्भ:
 
 

रोकथाम 
 
मृदा-संचारित कृमि संक्रमण के नियंत्रण के लिए रणनीति स्थानिक क्षेत्रों की ज़ोखिम से पीड़ित जनसंख्या को समय-समय पर दिए जाने वाले उपचार के माध्यम से रोग की रोकथाम और नियंत्रण है। 
 
ज़ोखिम से पीड़ित लोग निम्नलिखित हैं:
 
विद्यालय जाने से पूर्व की आयु वर्ग के बच्चे:
 
विद्यालय जाने की आयु वर्ग के बच्चे;
 
गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएं (जिसमें दूसरी और तीसरी तिमाही वाली गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाएं शामिल है)।
 
इसके अलावा संक्रमण को निम्नलिखित सावधानियां अपनाकर रोका जा सकता है:
 
स्वास्थ्य और स्वच्छता पर शिक्षा, स्वस्थ व्यवहार जैसे कि आहर को छुने, बनाने और देने से पहले साबुन व पानी से हाथ धोना, सुरक्षात्मक जूते पहनना, खाने से पहले स्वच्छ पानी से कच्ची सब्जियों और फलों को अच्छी तरह से धोना इत्यादि को प्रोत्साहित करके संचारण एवं पुन:संक्रमण को कम करती है। 
 
1. मानव मल-मूत्र का स्वच्छता से निपटान करना।
 
2. समय-समय पर दिए जाने वाले कृमि मुक्ति/कृमिहरण को विद्यालय-आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रम या विद्यालय जाने से पूर्व आयु वर्ग के बच्चों के लिए विटामिन ए पूरक कार्यक्रम या बाल स्वास्थ्य अवधि के साथ आसानी से एकीकृत किया जा सकता है।
 
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने पहले चरण में बारह राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में "राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस" (एनडीडी) की शुरुआत की है; इसके बाद इसे भारत के सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में विस्तारित किया जाएगा।
 
भारत में एनडीडी का उद्देश्य सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों के मंच के माध्यम से एक वर्ष से उन्नीस वर्ष की आयु वर्ग के बीच के सभी पूर्व विद्यालयी और विद्यालयी आयु वर्ग के बच्चों (नामांकित और गैर-नामांकित) के समग्र स्वास्थ्य, पोषण की स्थिति, शिक्षा तक पहुंच और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए कृमि को दूर करना है।
 
संदर्भ:
 
 

  • PUBLISHED DATE : Jun 27, 2018
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Jun 27, 2018

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