ज़ीका वायरस

परिचय 
 
ज़ीका वायरस मच्छर जनित वायरल रोग है। यह रोग संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। ज़ीका वायरस को सबसे पहले युगांडा के ज़ीका जंगल में वर्ष 1947 में रीसस बंदरों में पहचाना गया था। वर्ष 1952 में इस वायरस को मनुष्य में सीरोलॉजिकल परीक्षण के माध्यम से संयुक्त गणराज्य तंजानिया और युगांडा में पहचाना गया था। इस वायरस को वर्ष 1968 में नाइजीरिया में मानव नमूनों से अलग किया गया था। अफ्रीका, अमेरिका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र में ज़ीका वायरस रोग के प्रकोप को रिकार्ड किया गया है। वर्ष 2007 में, दक्षिण प्रशांत में माइक्रोनेशिया के संघ राज्यों के याप द्वीप में पहला ज़ीका वायरस प्रकोप रिकार्ड किया गया। अक्टूबर 2013, फ्रेंच पोलिनेशिया में पहला ज़ीका वायरस प्रकोप रिकार्ड किया गया।
 
मई 2015, ब्राजील के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने देश के उत्तर-पूर्व में ज़ीका वायरस के संचारण की पुष्टि की। अक्टूबर 2015 के बाद से, अन्य देशों और अमेरिका के राज्यों में वायरस की उपस्थिति रिकार्ड की गयी है।
 
ज़ीका वायरस संक्रमण के साथ-साथ माइक्रोसेफली के सामूहिक (स्थिति, जिसमें छोटे सिर के साथ बच्चे का जन्म होना या जन्म के बाद बच्चे के सिर का बढ़ना रूकना) मामलों तथा वर्ष 2014, ब्राजील में अन्य न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर/तंत्रिका संबंधी रोग (ग्‍यूलेन-बैरे सिंड्रोम) (जीबीएस) और फ्रेंच पोलिनेशिया में समान क्लस्टर में सूचना मिली। 
 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गर्भावस्था के दौरान ज़ीका वायरस संक्रमण और माइक्रोसेफली के बीच कारणात्मक संबंधों पर दृढ़तापूर्वक संदेह किया है तथा किसी भी संभावित लिंक को जानने के लिए अधिक जांच और शोध की सिफ़ारिश की हैं। आज तक कोई भी वैज्ञानिक साक्ष्य ज़ीका और माइक्रोसेफली या जीबीएस के बीच लिंक की पुष्टि नहीं करता है।
डब्ल्यूएचओ ने 1 फ़रवरी 2016 को अमेरिका में ज़ीका वायरस रोग के बढ़ते प्रकोप के मध्य नवजात शिशु विकृति तथा न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर/तंत्रिका संबंधी रोगों के बढ़ते मामलों को अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया।
 
वर्ष 2007 से 46 देशों में ज़ीका वायरल संचारण दर्ज़ किया गया है, जिसमें वर्ष 2015 और 2016 के बीच 34 देशों सहित राज्यों में सूचित स्थानिक संचारण या स्थानीय अर्जित संक्रमण की सूचना मिली है, जिसमें वायरल परिसंचरण के संकेत के साथ छह देश, पांच देश जहां ज़ीका वायरस समाप्त हो चुका है तथा स्थानीय अर्जित मामले के साथ एक देश, लेकिन वेक्टर जनित संचारण के बिना मामलों की सूचना मिली है।
 
अधिक जानकारी पाएं-
 
ज़ीका वायरस के बारे में प्रश्न और उत्तर-
 
 
 
 
ज़ीका वायरस रोग के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश- http://www.mohfw.nic.in/index
 
(क) ज़ीका वायरस रोग पर दिशानिर्देश- http://www.mohfw.nic.in/
 
(ख) एडीज मच्छर के नियंत्रण हेतु  एकीकृत वेक्टर प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश- http://www.mohfw.nic.in/
 
(ग) क्या करें और क्या न करें- http://www.mohfw.nic.in/
 
(घ) ज़ीका वायरस रोग के लिए यात्रा सलाह- http://www.mohfw.nic.in/
 
(ई) ज़ीका वायरस रोग (3 फरवरी 2016 को अद्यतन) पर तथ्य पत्रक- http://www.mohfw.nic.in/
 
(च) ज़ीका वायरस का पता लगाने और निदान के लिए दिशानिर्देश- http://www.mohfw.nic.in/
 
प्रयोगशाला निदान के लिए (एनआईवी, पुणे) ज़ीका वायरस  रेफरल फॉर्म- niv.co.in/Zika_viral_disease_CRF.pdf
 
 
संदर्भ:
 
 
 
 
 
       

लक्षण
 
ज़ीका वायरस रोग से पीड़ित अधिकांश लोगों में लक्षण या तो स्पर्शोन्मुख (80% तक) होते हैं या अन्य आर्बोवायरस संक्रमण (किसी अन्य तरह के लक्षण) जैसे कि डेंगू के समान लक्षण दिखाई देते हैं तथा इसमें बुखार, त्वचा पर चकत्ते, नेत्रश्लेष्मलाशोथ, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, बेचैनी, सिरदर्द शामिल हैं। आमतौर पर ये लक्षण हल्के और दो से सात दिनों तक रहते हैं। ज़ीका वायरस रोग की ऊष्मायन अवधि (लक्षण उजागर होने का समय) स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ ही दिनों में स्पष्ट हो जाने की संभावना, तक होती है।
 
डेंगू की तुलना में, ज़ीका वायरस संक्रमण के मामले में नैदानिक तस्वीर (रोगी की स्थिति) हल्के से मध्यम होती है, बुखार की शुरुआत अधिक तीव्र (एक्यूट) और अवधि में कम होती है।
वर्ष 2013-2014 और 2015 में क्रमश ज़ीका प्रकोप के दौरान फ्रेंच पॉलिनेशिया और ब्राजील से जन सामान्य में गुइल्लेन-बर्र सिंड्रोम (जीबीएस) और नवजात शिशुओं में माइक्रोसेफेली के बढ़े मामलों की सूचना मिली। चिकित्सा विशेषज्ञों को माइक्रोसेफेली और जीबीएस के ज़ीका वायरस के साथ जुड़ा होने का संदेह है, लेकिन अब तक कोई वैज्ञानिक साक्ष्य इस लिंक की पुष्टि नहीं करता है*।
 
(क) गुइल्लेन-बर्र सिंड्रोम- यह वह स्थिति हैं, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिका तंत्र के हिस्से पर हमला करती है। यह बहुत सारे वायरस के कारण हो सकता है तथा यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। प्रमुख लक्षणों में मांसपेशियों में कमजोरी और हाथ और पैर में झुनझुनी शामिल है। यदि सांस की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं, तो गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती है)।
 
(ख) माइक्रोसेफेली- यह वह स्थिति होती है, जिसमें बच्चा छोटे सिर के साथ पैदा होता है या जन्म के बाद सिर बढ़ना बंद हो जाता है।)। 
 
संदर्भ:
 
 
 
 

कारण
 
ज़ीका वायरस मच्छर जनित फ्लाविविरडे परिवार का तथा फ्लाविवायरस प्रजाति का विषाणु है, जो कि डेंगू रोग के विषाणु का वाहक भी है।
 
संचारण-
 
वेक्टर- ज़ीका वायरस उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मुख्यत एडीज इजिप्टी, एडीज जीनस से संक्रमित मच्छर के काटने के माध्यम से लोगों में प्रसारित होता है। यह वही मच्छर है, जो कि डेंगू, चिकनगुनिया और पीले बुख़ार रोग के विषाणु का भी वाहक है।
 
एडीज मच्छर की अन्य प्रजातियां जैसे कि एडीज एलबोपिकटस, एडीज हेनसिली, एडीज पॉलीनेसिनेसिस ज़ीका वायरस के प्रसार में वेक्टर के रूप में पाये जाते है।
 
कुछ प्रमाण बताते हैं, कि ज़ीका वायरस रक्त-आधान, प्रसवकालीन संचारण और यौन संचारण के माध्यम से भी मनुष्यों में फैलता है। 
 
एडीज मच्छर के बारे में कुछ तथ्य-
 
  • एडीज इजिप्टी मानव वातावरण से निकटता से जुड़ा हुआ है और घर के अंदर (फूलदान, बाथरूम में मज़बूत (कंक्रीट से बने)  पानी के टैंक) तथा और कृत्रिम आउटडोर (वाहनों के टायर, जल भंडारण के बर्तन, बेकार कंटेनर) वातावरण में पनपता है।  
  • अंडे पानी के बिना एक साल तक जीवित रह सकते हैं। एक बार पानी उपलब्ध हो (यहां तक कि इकट्ठा (खड़े) हुए पानी की थोड़ी सी मात्रा), अंडे लार्वा और फिर वयस्क मच्छरों में विकसित हो जाते हैं।
  • एडीज इजिप्टी दिन के दौरान सक्रिय होते हैं तथा आमतौर पर सुबह और देर दोपहर/शाम के के दौरान काटते हैं। 
  • जब मादा एडीज एजिप्टी संक्रमित व्यक्ति को काटती (रक्त पीना) है, तब वह वायरस को प्राप्त करती है।
  • मादा एडीज इजिप्टी मच्छर आमतौर पर 400 मीटर की औसत पर उड़ती है, लेकिन यह एक स्थान से दूसरे स्थान तक मनुष्य के माध्यम से अकस्मात स्थानांतरित होती है। 
 
संदर्भ:
 
 
 

निदान
 
जिन लोगों ने रोग की शुरुआत से दो सप्ताह पहले के दौरान संचारण वाले क्षेत्रों में यात्रा की तथा एक्यूट बुख़ार की शुरूआत, मैकुलो पैपुलर रैश (धब्बे और दानेदार चकत्ते) और अर्थ्रेल्जिया (जोड़ों का दर्द) से पीड़ित रोगियों पर ज़ीका वायरस संक्रमण से पीड़ित होने का संदेह किया जाना चाहिए।
 
ज़ीका वायरस का निदान रिवर्स ट्रांसक्रिप्टस पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) और रक्त के नमूने से वायरस अलगाव (शोध के उद्देश्य के लिए) के माध्यम से किया जाता है। इन तरीकों से ज़ीका वायरस का पता लक्षणों की शुरूआत के बाद पहले तीन से पांच दिनों के दौरान एकत्रित लार या मूत्र के नमूनों या रोग की शुरुआत के बाद के पहले एक से तीन दिनों में एकत्र सीरम से किया जा सकता है।
 
सीरोलॉजिकल परीक्षण/सीरम विज्ञानी परीक्षण (इम्यूनोफ्लोरेसेंस अर्से और एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसोरबेंट अर्से) एंटी ज़ीका वायरस आईजीएम और आईजीजी एंटीबॉडी की उपस्थिति दिखा सकता हैं। सेरोलॉजी से पता लगाना मुश्किल है, क्योंकि वायरस डेंगू, वेस्ट नाइल और पीले बुख़ार जैसे अन्य फ्लैविवायरस के साथ विपरीत प्रतिक्रिया दिखा सकता है। भारत में रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), दिल्ली और राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे में तीव्र बुख़ार की अवस्था में ज़ीका वायरस रोग का प्रयोगशाला निदान प्रदान करने की क्षमता है। ये दो संस्थान प्रकोप की जांच और प्रयोगशाला निदान की पुष्टि करने में सहयोग करने के लिए दो शीर्ष प्रयोगशालाएं हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), प्रयोगशाला निदान करने के लिए दस अतिरिक्त प्रयोगशालाओं को सुदृढ़/मज़बूत करेगा।
 
संदर्भ:
 
 
 

प्रबंधन
 
ज़ीका वायरस के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है। चिकित्सा कर्मियों के परामर्श के साथ मलेरिया, डेंगू, और जीवाणु संक्रमण जैसी अधिक गंभीर स्थितियों को छोड़कर लक्षणात्मक उपचार की सलाह दी जाती है। डेंगू के कुछ मामलों में गंभीर जटिलताओं के कारण डेंगू से ज़ीका वायरस संक्रमण को अलग करना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा ज़ीका और डेंगू के साथ सह-संक्रमण हो सकता है।
 
बुख़ार से राहत दिलाने के लिए एसिटामिनोफेन या पैरासिटामोल के रूप में लक्षणात्मक उपचार दिया जाता है। मैकुलोपैपुलर रैश के कारण होने वाली खुजली से राहत के लिए एंटीहिस्टामिनिक दवा का उपयोग किया जाता है।
 
(एस्पिरिन और अन्य गैर-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लैमेटरी ड्रग्स के उपयोग की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि नैदानिक लक्षणों का कारण डेंगू या चिकनगुनिया रोग हो सकता है, जिसमें गैर-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लैमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) नहीं (अंतर्विरोध*) दिया जाता है।
 
ज़ीका वायरस से पीड़ित लोगों को पर्याप्त आराम करना चाहिए और अधिक से अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीने की सलाह दी जाती है।
 
रोगी को अलग रखना-
 
रोगी को मच्छरदानी (कीटनाशक से उपचारित या अन-उपचारित) के भीतर या जाली/स्क्रीन लगी खिड़की/दरवाजों में रहने की सिफ़ारिश की जाती है। ये सावधनियां रोग के पहले सप्ताह में रोगी को मच्छरों से काटने से बचाने और दूसरों के संक्रमण में फैलाने से रोकती है।
 
इसके अलावा, ज़ीका वायरस संक्रमण से पीड़ित रोगियों की देखभाल करने वाले चिकित्सकों या स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को मच्छर दूर भागने वाले उत्पादों और लंबी बाजु व पैंट वाले कपड़े पहनकर मच्छरों के काटने से बचना चाहिए। किसी भी न्यूरो-विकासात्मक परिणाम को निर्धारित करने के लिए जन्मजात विकृति से पीड़ित नवजात बच्चों की निगरानी की जानी चाहिए।
 
वर्तमान में कोई टीका उपलब्ध नहीं है।
 
संदर्भ:
 
 
 
 www.paho.org/hq/index.php (15th फरवरी 2016 तक)*

जटिलताएं 
 
संभावित जटिलताएं- 
 
वर्ष 2013 और 2015 में क्रमशः फ्रेंच पॉलीनेशिया और ब्राजील में बड़े प्रकोप के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने जन सामान्य में ज़ीका वायरस रोग (गिलियन-बैरे सिंड्रोम) की संभावित न्यूरोलॉजिकल और ऑटो-प्रतिरक्षा जटिलताओं की सूचना दी थी। 
 
डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञों को गर्भावस्था के दौरान ज़ीका वायरस संक्रमण के बीच कारणात्मक संबंध का दृढ़तापूर्वक संदेह है तथा माइक्रोसिफेली से पीड़ित शिशुओं की घटनाएं बढ़ी है। हालांकि ज़ीका वायरस और माइक्रोसेफली के बीच के संबंधों को समझने के लिए अधिक वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।
 
संदर्भ:
 
 

रोकथाम
 
ज़ीका वायरस संक्रमण के लिए मच्छर और उनके प्रजनन स्थल महत्वपूर्ण ज़ोखिम के कारक है। ‘रोकथाम और नियंत्रण’ प्रजनन स्रोतों में कमी (प्रजनन स्थलों को हटाने और समाप्त करने) के माध्यम से मच्छरों में कटौती तथा मच्छर और लोगों के बीच कम संपर्क करने पर निर्भर करता है।
 
स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीजीएचएस), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (www.mohfw.nic.in/) ने ज़ीका वायरस रोग की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी किए हैं। 
 
ज़ीका वायरस रोग की रोकथाम और नियंत्रण में निम्नलिखित शामिल हैं-
 
क. निगरानी बढ़ाना-
 
(1) समुदाय आधारित निगरानी- डीजीएचएस ने प्राथमिक मामले और गिलियन-बैरे सिंड्रोम (Gullian Barre Syndrome) का पता लगाने के लिए एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) द्वारा सामुदायिक स्तर पर निगरानी बढ़ाने की सिफ़ारिश की है। मातृ और बाल स्वास्थ्य विभाग ने नए जन्मे शिशुओं के बीच माइक्रोसेफली के मामलों के समूह की जांच की सलाह दी है। 
 
(2) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा/बंदरगाह- सभी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों/बंदरगाहों के अधिकारियों को सलाह दी जाती है, कि वे प्रभावित देशों से लौटने वाले यात्रियों और बुख़ार से पीड़ित लोगों पर नज़र रखें और अनुशंसित विमान कीटाणुशोधन दिशानिर्देशों का पालन करें।
 
(3) संदिग्ध प्रकोप की जांच के लिए रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी)- संदिग्ध प्रकोपों की जांच के लिए आरआरटी को सभी स्तरों पर सक्रिय करने की सलाह दी गयी है। एनसीडीसी दिल्ली, को देश के किसी भी हिस्से में प्रकोप की जांच के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है।
 
(4) प्रयोगशाला निदान- एनसीडीसी, दिल्ली और एनआईवी, पुणे प्रकोप की जांच में सहयोग और प्रयोगशाला निदान की पुष्टि करने के लिए शीर्ष प्रयोगशाला हैं। आईसीएमआर देश में दस अतिरिक्त प्रयोगशालाओं को मज़बूत करेगा।
 
ख. ज़ोखिम के लिए संचार- राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के प्रशासन को ज़ीका वायरस रोग के बारे में आब्स्टिट्रिशन (प्रसूति/स्त्री रोग विशेषज्ञ), पैडियट्रिशियन (शिशु-चिकित्सक) और न्यूरोलॉजिस्ट सहित चिकित्सकों तथा प्रतिकूल गर्भावस्था के परिणाम (भ्रूण क्षति, माइक्रोसेफली) के साथ संभावित लिंक्स के बीच जागरूकता उत्पन्न करना है। गैर-सरकारी संगठन को भी ज़ीका वायरस रोग के बारे में संवेदनशील होना चाहिए।
 
ग. वेक्टर नियंत्रण- मच्छरों पर नियंत्रण ही एकमात्र उपाय है, जो कि डेंगू, चिकनगुनिया और ज़ीका जैसे वेक्टर जनित वायरस के संचारण को बाधित कर सकता है। इसे उन्नत एकीकृत वेक्टर प्रबंधन (आईवीएम) से प्राप्त किया जा सकता है।
 
आईवीएम में शामिल हैं-
 
(ए) वेक्टर निगरानी- एडीज मच्छरों की आबादी का शीघ्र पता लगाने के लिए लार्वा सर्वेक्षण और वयस्क सर्वेक्षण महत्वपूर्ण हैं, ताकि उचित नियंत्रण उपायों की शुरुआत की जा सकें।
 
(बी) वेक्टर प्रबंधन- इसमें मच्छर प्रजनन और वयस्क मच्छर जनसंख्या की समाप्ति के उपायों को शामिल किया गया है। 
 
ये इस प्रकार है-
 
1. पर्यावरण प्रबंधन-
  • एडीज मच्छरों के अपरिपक्व चरण को नियंत्रित करने के लिए पर्यावरण प्रबंधन पद्धति का उपयोग किया जाता है।
  • निम्नलिखित के माध्यम से घरों में और घरों के आसपास वास्तविक या संभावित लार्वा के आवासों को कम करने के प्रयासों को तेज़ करना है:
  • मच्छरों द्वारा नए अंडे देने को रोकने के लिए घर में पानी के सभी कंटेनरों को ढककर रखें। पानी के टैंक, कंटेनर, कूलर, पक्षियों और पालतू जानवरों के पानी पीने के बर्तनों, पौधे युक्त गमलों, रिसने वाली तश्तरी (ड्रिप ट्रे) को सप्ताह कम से कम एक बार अवश्य खाली करें और सुखाएं।
  • अवरुद्ध गटर और सपाट छतों की नियमित जांच करें, जिनमें जल निकासी खराब/बाधित हो सकती है।
2. जैविक नियंत्रण-
  • सजावटी पानी के टैंक/बगीचे में लार्वा खाने वाली मछलियों (गंबूसिया/गुप्पी) रखें।
  • बैक्टीरिया, बेसिलस थुरिनजेनेसिस (बीटी एच -14) का उपयोग स्थिर पानी में जैविक कीटनाशी (लार्वीसाइड) के रूप में करें। जब इनका उपयोग निर्देशों के अनुसार किया जाता है, तब ये मनुष्यों, गैर-लक्षित पशु प्रजातियों या पर्यावरण के लिए कतई ख़तरनाक नहीं है।
 
3. रासायनिक नियंत्रण-
  • जहां पानी की कमी या अनियमितता और अविश्वसनीय जल आपूर्ति के कारण पानी को संरक्षित या संग्रहित करना पड़ता है, वहां रासायनिक कीटनाशी/लार्वीसाइड (जैसे कि टेमीफॉस) का उपयोग पानी के बड़े स्थायी कंटेनर में किया जाता हैं। टेमीफोस (ऑर्गनोफॉस्फेट कम्पाउन्ड) की सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लार्वाइडिस के रूप में सिफ़ारिश की जाती है।
  • एडल्टीसाइड (वयस्क कीटों को समाप्त करने के लिए उपयोग किए जाने वाला कीटनाशक)- जिन क्षेत्रों में डेंगू, चिकनगुनिया और/या ज़ीका वायरस संक्रमण के मामलों का पता लगता है, उन क्षेत्रों में वयस्क मच्छरों को नियंत्रण के लिए पाइरेथ्रम स्प्रे या मैलाथियन फॉगिंग या अल्ट्रा-लो वॉल्यूम (यूएलवी) स्प्रे का उपयोग करने की सिफ़ारिश की जाती है।
(सी) व्यक्तिगत सुरक्षात्मक/निवारक उपाय-
  • कीट दूर भागने वाले उत्पादों का उपयोग; कपड़े (अच्छा हो, कि हल्का रंग) पहनें, जो कि शरीर को जितना संभव हो, उतना ढककर रखता हो; रोकथाम के उपायों/अवरोधों जैसे कि खिड़कियों और दरवाजों पर स्क्रीनिंग (जाली) का उपयोग; दिन के दौरान सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
  • चूंकि एडीस मच्छर दिन में काटने वाला मच्छर हैं, इसलिए यह सिफ़ारिश की जाती है, कि जो लोग दिन में सोते हैं, खासकर छोटे बच्चे, रोगी या बुजुर्ग, उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए कीटनाशक-उपचारित मच्छरदानी का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • जिन क्षेत्रों में ज़ीका वायरस के रोगी (डेंगू, चिकनगुनिया या ज़ीका वायरस) फैल रहे है, उनके पारिवारिक सदस्यों और समुदाय को व्यक्तिगत निवारक उपायों का पालन अवश्य करना चाहिए।
(4) वैधानिक उपाय-
  • परिस्थितियों से बचने के लिए उपयुक्त कानूनों और उप-नियमों को लागू और कार्यान्वित किया जाना चाहिए। ये परिस्थितियां विभिन्न स्तरों पर मच्छरों के प्रजनन करने के लिए उपयुक्त/अनुकूल होती है।
(ई) सामुदायिक सहभागिता और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग के लिए स्वास्थ्य शिक्षा-
 
अन्य क्षेत्रों/विभागों की भागीदारी के साथ एडीस मच्छरों के प्रजनन के बिंदुओं को खत्म करने के लिए सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
 
4. यात्रा सलाह-
  • प्रभावित देशों/क्षेत्रों के सभी यात्रियों को मच्छरों के काटने से बचने, विशेषकर दिन के दौरान (मच्छर दूर भगाने वाली क्रीम, मच्छर दूर भगाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मच्छरदानी का उपयोग और शरीर के समस्त अंगों को ढंकने वाले वस्त्रों का उपयोग करना) व्यक्तिगत सुरक्षात्मक उपायों को अपनाना चाहिए।
  • प्रभावित देशों की गैर-अनिवार्य यात्रा को स्थगित/रद्द किया जाना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं या गर्भधारण करने वाली महिलाओं को अपनी प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा को स्थगित/रद्द करना चाहिए।
  • किसी प्रभावित देश से वापसी के दो सप्ताह के भीतर यात्रियों को गंभीर रोग से पीड़ित होने पर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।
  • ज़ीका वायरस संचारण वाले क्षेत्र में यात्रा करने वाली गर्भवती महिला को चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
  • डब्ल्यूएचओ ने गर्भावस्था पर विचार करने वाली महिलाओं और गर्भवती महिलाओं के लिए निम्नलिखित निवारक उपायों की सिफ़ारिश की है: 
  • गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता के साथ अपनी यात्रा के बारे में बात करनी चाहिए तथा जहां पर स्थानीय अर्जित संक्रमण उपस्थित है ऐसे किसी भी क्षेत्र की यात्रा स्थगित करने पर विचार करना चाहिए।
  • जब तक यौन संचारण के ज़ोखिम के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी जाती है, जहां ज़ीका वायरस प्रसारित है वहां से लौटने वाली सभी महिलाओं और पुरूषों को विशेषकर गर्भवती महिलाओं और उनके भागीदारों को कंडोम के सही और लगातार उपयोग के माध्यम से सुरक्षित सेक्स का अभ्यास करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं सहित सभी यात्रियों को, जहां पर स्थानीय अर्जित संक्रमण उपस्थित हो रहा है, वहां पर यात्रा के दौरान मच्छरों के काटने से बचने वाले चरणों का दृढ़ता से पालन करना चाहिए।
  • (डब्ल्यूएचओ इस स्तर पर किसी भी यात्रा या व्यापारिक प्रतिबंध की सिफ़ारिश नहीं करता है)।
5. अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय- एनसीडीसी, दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों (आईएचआर) के लिए केंद्र बिंदु (फोकल प्वाइंट) है जो कि, फ़ैली महामारी पर अद्यतन जानकारी के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और प्रभावित देशों के साथ जानकारी तलाशने/साझा करने के लिए अधिकृत है।
 
6. अनुसंधान- भारत में आईसीएमआर को अनुसंधान करने की सलाह दी गयी है।
 
टीकाकरण- वर्तमान में ज़ीका वायरस रोग की रोकथाम के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार लगभग पंद्रह फार्मास्यूटिकल कंपनियों (औषधीय कंपनी) ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान) से डीएनए टीकाकरण और भारत में भारत बायोटेक से निष्क्रिय उत्पाद विकास के उन्नत स्तर पर है। किसी बड़े पैमाने पर परीक्षण के लिए टीकाकरण में कम से कम अठारह महीने लगेंगे।
 
7. निगरानी- डीजीएचएस के तहत संयुक्त निगरानी समूह नियमित आधार पर स्थिति की निगरानी कर रहा है।
 
मुख्य संदेश:
 
रोकथाम का सबसे बेहतर उपाय मच्छर के काटने से बचना है।
 
संदर्भ:
 
 
 
 
www.who.int/emergencies/zika-virus/situation-report (15th फरवरी 2016 तक)*

  • PUBLISHED DATE : Aug 30, 2018
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Aug 30, 2018

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