स्क्रब टाइफस

परिचय
 
स्क्रब टायफस एक एक्यूट, बुख़ारवाला, संक्रामक रोग है, जो कि ओरिएंटिया (पूर्व में रिकेट्सिया) सुटसुगमूशी (Tsutsugamushi)  के कारण होता है। इस रोग को सुटसुगमूशी (Tsutsugamushi)  रोग या शिगर-बोर्न टाइफस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक जूनोटिक रोग है, जो कि आर्थ्रोपोड वेक्टर ट्रॉम्बिकुलीड माइट द्वारा संचारित होता है। मनुष्य इस रोग में आकस्मिक वाहक हैं।
 
भारत के कई हिस्सों में स्क्रब टायफस पाया जाता है। जम्मू-नागालैंड से लेकर उप-हिमालयी पट्टी में स्थित क्षेत्रों में प्रकोप हुआ है। राजस्थान से भी प्रकोप की सूचना मिली थी। 2003-2004 और 2007 के दौरान हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) में स्क्रब टाइफ़स के प्रकोप की सूचना मिली थी। रोग का प्रकोप बरसात के मौसम में अक्सर होता है, हालांकि ठंडे महीनों के दौरान दक्षिणी भारत में प्रकोपों की सूचना मिलती है। स्क्रब टायफस भारत में दोबारा से होने वाला संक्रामक रोग है।
 
संदर्भ:
 
 

लक्षण
 
चकत्ते काटने की जगह पर विकसित हो जाते है। चकत्ते पेट और जांध के बीच के भाग, बग़ल, जननांग या गर्दन पर पाए जाते हैं। चकत्तों (अल्सरेट) में सड़ान/ख़राबी हो जाती है तथा अंत में काले रंग के निशान के साथ ठीक हो जाते है। 
 
ठंड लगना और बुख़ार (1040-1050 एफ), गंभीर सिरदर्द, आंखों (कंजाक्तिवा) की श्लेष्म झिल्ली में संक्रमण और लिम्फ नोड्स की सूजन हो जाती है।
लगभग एक हफ्ते के बाद चकत्ते हो जाते है और उसके बाद मैक्युलोपापुलर दाने सबसे पहले धड़ पर होते है तथा थोड़े दिनों में हाथ पैरों पर हो जाते है और त्वचा विवर्ण/सफ़ेद हो जाती है।
 
आमतौर पर उपचार के बिना दो सप्ताह के बाद लक्षण समाप्त हो जाते हैं।
 
इस रोग में जटिलताएं निमोनिया (30 से 65% मामले), मेनिंगोएन्फैलाइटिस और मायोकार्डिटिस हैं। निमोनिया और मायोकार्डिटिस के गंभीर मामलों में मृत्यु दर तीस प्रतिशत तक हो सकती है।
 
संदर्भ:
 
 

कारण
 
स्क्रब टाइफ़स ओरिएंटिया सुटसुगमूशी (Tsutsugamushi)  बोले जाने वाले बैक्टीरिया के कारण होता है। संक्रमण माइट (पिस्सू) लेप्टोट्रोम्बिडियम डेलियन द्वारा प्रेषित होता है।
 
मनुष्य तब संक्रमित होता है, जब वह माइट वाले स्थानों पर जाता है (मिट्टी वाला क्षेत्र, जिसमें माइक्रोपारिस्थितिक तंत्र माइट के लिए अनुकूल है) और माइट लार्वा (शिगर) द्वारा काटा जाता है। माइट केवल एक बार विकास चक्र के दौरान गर्मरक्ती प्राणी या नियततापी प्राणी के सीरम को खाता है तथा वयस्क माइट मनुष्य को नहीं खाता है। माइट में माइक्रोब (जीवाणु) डिम्बग्रंथि संचारण (कुछ आर्थ्रोपॉड, रोग जनित बैक्टीरिया को अपने अगले वंशजों में पारित करते है) के माध्यम से प्रेषित होते हैं।
 
मनुष्यों और कृन्तकों (कुतरने वाले जीव) को संक्रमित करने के लिए लार्वल (अविकसित) संग्रहण और वेक्टर दोनों के रूप में कार्य करता है।
 
काटने के बाद स्क्रब टाइफ़स की ऊष्मायन अवधि लगभग पांच से बीस दिन है (मतलब 10 से 12 दिन) होती है।
 
संदर्भ:
 
 

निदान
 
आमतौर पर स्क्रब टाइफस एक समान बुख़ार के रूप में होता है, जिसका पता लगाने के लिए प्रयोगशाला पुष्टि की आवश्यकता होती है।
 
रक्त परीक्षण- इस परीक्षण में पहले लिम्फोपेनिया और बाद में लिम्फोसाइटोसिस एवं थ्रोम्बोसाइटोपेनिया दिखाई दे सकता है।
 
मूत्र परीक्षण- अलबूमिनूरिया।
 
स्क्रब टाइफ़स का पता प्रयोगशाला में निम्नलिखित के माध्यम से किया जाता हैं:
 
 (क)  जीव का अलगाव।
 
 (ख) सेरोलॉजी।
 
 (ग) आणविक निदान (पीसीआर)।
 
निदान के लिए उपलब्ध कई सेरोलॉजिकल परीक्षण वील-फेलिक्स परीक्षण (डब्ल्यूएफटी), अप्रत्यक्ष इम्यूनोफ्लौरेन्टेंट परीक्षण (आईआईएफ), एंजाइम से जुड़े इम्युनोसॉरबेंट अरसे (एलिसा) है।
 
संदर्भ:
 
 

प्रबंधन
 
स्क्रब टायफस को एंटीबायोटिक दवाओं से उपचारित किया जाता है।
 
रोगी की उम्र और गर्भवती स्त्री की गर्भावस्था के चरण के आधार पर उपचार दिया जाता है।
 
अधिक जानकारी के लिए चिकित्सक से परामर्श करें।
 
संदर्भ:
 

जटिलताएं
 
इस रोग में जटिलताएं निमोनिया (तीस से  पैंसठ प्रतिशत मामलों में), मेनिंगोएन्सेफलाइटिस और मायोकार्डिटिस हैं। निमोनिया और मायोकार्डिटिस के गंभीर मामलों में मृत्यु दर तीस प्रतिशत तक हो सकती है।

रोकथाम 
 
स्क्रब टायफस के लिए कोई टीका नहीं है।
 
स्थानिक क्षेत्रों में कुछ सावधानी अपनायी जानी चाहिए-
 
बचाव वाले कपड़े पहनें।
 
शिगर के काटने को रोकने के लिए डाईब्यूटाइल फथैलेट, बेंजाइल बेंजोएट, डायथाइल टोलुमाइड तथा अन्य कीट दूर भागने वाले पदार्थ त्वचा और कपड़ों पर लगाएं।
 
मैदान या घास पर न बैठें या लेटे; मैदान पर बिछाने के लिए उपयुक्त चादर या अन्य उपकरण का उपयोग करें।
 
संचारण चक्र समाप्त करने के लिए वनस्पति और मिट्टी का रासायनिक उपचार एवं कृंतक (कुतरने वाले जीव) नियंत्रण मदद कर सकते है।
 
संदर्भ:
 

  • PUBLISHED DATE : Jan 29, 2018
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Jan 29, 2018

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