सारकोमा

परिचय
 
सारकोमा एक कैंसर है, जो कि मूल मेसेंकाइमल की कोशिकाओं से उत्पन्न होता है। घातक ट्यूमर, जो कि कैन्सिलस बोन, उपास्थि, वसा, मांसपेशियों, नाड़ी संबंधी या हेमटापोएटिक ऊतकों से बनते है, उनको सारकोमा कहा जाता है। सारकोमा के मुख्य तीन प्रकार हैं: नरम ऊतकों का सारकोमा, अस्थि सारकोमा और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर (जीआईएसटी) और सौ  अन्य प्रकार के सारकोमा है।
 
अस्थि सारकोमा सामान्य चार प्रकार का होता हैं:
 
ऑस्टियोसारकोमा: यह अस्थि कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार है। यह अधिकांश मामलों में बच्चों और युवाओं में विकसित होता है, जो कि पांच से बीस वर्ष की आयु वर्ग के बीच होते है, जो कि युवाओं (ल्यूकेमिया और मस्तिष्क ट्यूमर के बाद) में कैंसर का तीसरा सबसे सामान्य कारण है। ऑस्टियोसारकोमा सामान्यत: बढ़ी हड्डियों में विकसित होता है, जैसे कि जांघ की हड्डी (फिमूर) या पिंडली की हड्डी (टिबिया)।
 
ईविंग सारकोमा: ईविंग सारकोमा सामान्यत: कूल्हा, जांघ की हड्डी या पिंडली की हड्डी में विकसित होता है तथा यह दस से बीस वर्ष की आयु वर्ग के बीच के बच्चों और युवाओं में सबसे अधिक होता है।
 
चोंड्रोसारकोमा: इस प्रकार की हड्डी का कैंसर सामान्यत: वयस्कों में विकसित होता है, जो कि चालीस और पचास वर्ग की उम्र के बीच होते हैं। चोंड्रोसारकोमा विकसित होने वाला सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कूल्हा, जांघ की हड्डी, ऊपरी बांह की हड्डी, कंधे की हड्डी (स्कैपुला) और पसलियों हैं।
 
कोरडोमा: ज्यादात्तर कोरडोमा सैक्रम (कमर के पीछे की तिकोनी हड्डी), स्कल एंड स्पाइन (सिर एवं  मेरुदण्ड) की सतह में उपत्पन होते है, लेकिन यह चालीस या उससे अधिक आयु वर्ग के वयस्कों को प्रभावित करता है।
 
संदर्भ:
 
 
 
 
 

लक्षण 
 
हड्डी के कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण हड्डी में दर्द है। यह आमतौर पर प्रभावित हड्डी में कोमलता महसूस होने से शुरू होता है और फिर धीरे-धीरे लगातार दर्द में बढ़ोत्तरी हो  जाती है जो कि प्राय: प्रभावित हड्डी का उपयोग करते समय या रात में अत्यधिक महसूस होता है।
 
हड्डियों के कैंसर के अन्य लक्षणों में निम्न शामिल हैं:
  • 38सी (100.4 एफ) या उससे अधिक उच्च तापमान (बुख़ार)।
  • वज़न घटना।
  • सामान्यत: रात में पसीना आना।
 
संदर्भ:
 

कारण
 
आमतौर पर कैंसर डीएनए संरचना में परिवर्तन से शुरू होता है, जिसे उत्परिवर्तन कहा जाता है।

निदान
 
एक्स-रे: एक्स-रे प्राय: कैंसर के कारण क्षतिग्रस्त हड्डियों या उसके कारण बढ़ती नई हड्डियों का पता लगाता है।
 
एमआरआई स्कैन: एमआरआई स्कैन हड्डियों के अंदर किसी भी कैंसरयुक्त ट्यूमर के आकार और प्रसार का आकलन करने का प्रभावी उपाय है।
 
बायोप्सी: हड्डियों के कैंसर का पता लगाने का अन्य सबसे सुनिश्चित प्रभावित उपाय हड्डी का नमूना लेना और उसे परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजना है। इसे बायोप्सी के नाम से जाना जाता है।
 
संदर्भ:
 

प्रबंधन
 
कीमोथेरेपी: आमतौर पर इसका उपयोग ट्यूमर के आकार को कम करने और किसी भी तरह की कैंसरयुक्त कोशिकाओं को उपचारित करने के लिए किया जाता है, जो कि फैल सकती है।
 
सर्जरी: कीमोथेरेपी के बाद कैंसरयुक्त हड्डी के हिस्से को निकालने के लिए सर्जरी की जाती है। कई मामलों में निकाली गई हड्डी का पुनर्निर्माण संभव है। इसे लिंब-स्पेरिंग सर्जरी के नाम से जाना जाता है। सर्जरी के बाद किसी भी तरह की बची कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए आगे कीमोथेरेपी उपचार दिया जा सकता है।
 
रेडियोथेरेपी: इसका उपयोग उपचार के लिए भी किया जाता है तथा कुछ प्रकार के कैंसर (जैसे कि ईविंग सारकोमा) के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
 
संदर्भ:
 

  • PUBLISHED DATE : Jan 18, 2018
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Jan 18, 2018

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