ब्रूसीलोसिस

परिचय
 
ब्रूसीलोसिस एक ज़ूनोटिक (कोई भी बीमारी या संक्रमण) रोग हैं, जो कि स्वाभाविक रूप से कशेरुकी जीवाश्मिकी से मनुष्यों में फैलता है तथा यह मनुष्य से जानवरों में हो सकता है। उसको ज़ूनोटिक रोग कहते है।
 
इसे "लहरदार बुखार", "भूमध्यसागरीय ज्वर (भूमध्य सागर के नज़दीक बसने वाले देशों में होने वाला बुख़ार)", "माल्टा ज्वर" के नाम से भी जाना जाता है।
ब्रूसीलोसिस मुख्यतः मवेशियों, शूकर, बकरी, भेड़ और कुत्तों को होने वाला पशुजन्यरोग है।
 
संक्रमण मनुष्य में संक्रमित सामग्री जैसे कि जन्म के समय निकलने वाले पदार्थ के साथ पशुओं के प्रत्यक्ष संपर्क या पशु उत्पाद सेवन से अप्रत्यक्ष या हवा में उपस्थित वातानीत एजेंटों को सांस के भीतर लेने से फैलता है। 
 
मनुष्य में संक्रमण का प्रमुख स्रोत कच्चे दूध का सेवन एवं कच्चे दूध से निर्मित चीज है। यह पशुधन (व्यावसायिक) से होने वाला रोग भी है। यह उन लोगों को होता है, जो कि पशुधन के क्षेत्र में कार्य करते है। यह सभी आयु वर्ग के समूहों तथा स्त्री एवं पुरुष दोनों लिंगों को प्रभावित करता है।
 
संदर्भ:
 

लक्षण 
 
शुरुआती लक्षणों में बुख़ार, कमजोरी, बेचैनी, आहार, सिरदर्द, भूख में कमी, मांसपेशियों और जोड़ों और/या पीठ में दर्द, थकान शामिल हैं।
 
कुछ संकेत और लक्षण लंबे समय तक रह सकते हैं, जैसे कि-
 
आवर्तक बुख़ार, गठिया, अंडकोष और अंडकोष के क्षेत्र की सूजन, हृदय (एंडोकार्टिटिस) की सूजन, क्रोनिक थकान, अवसाद, यकृत और/या तिल्ली की सूजन।
जटिलताएं शरीर की किसी भी अंग प्रणाली को प्रभावित कर सकती हैं।
 
संदर्भ:
 

कारण
 
ब्रूसीलोसिस बैक्टीरिया ब्रुसेला की विभिन्न प्रजातियों जैसे कि ब्रूसेला अबोर्टस, ब्रूसेला मेलिनटेंसिस, ब्रुकेला सुइस, ब्रुसेला केनिस के कारण होता है।
 
ये संक्रमित जानवरों के मूत्र, दूध एवं गर्भनालीय तरल पदर्थों में अधिक संख्या में निकलते है।
 
संक्रमण जानवरों से तीन अलग-अलग तरीकों के माध्यम से मनुष्य में फैलता है।
 
संक्रमण संक्रमित सामग्री जैसे कि जन्म के समय निकलने वाले पदार्थो, रक्त, उघड़ी त्वचा, मूत्र, बलगम झिल्ली या नेत्रश्लेष्मला (कंजाक्तिवा) के साथ सीधे संपर्क से होता है। 
 
संक्रमण कच्चे दूध से निर्मित चीज एवं कच्चे दूध जैसे पशु उत्पादों के सेवन से अप्रत्यक्ष होता है।   
 
यह मनुष्यों में संक्रमण का प्रमुख स्रोत है। 
 
संक्रमण सांस लेने के माध्यम से हवा में उपस्थित वातानीत एजेंटों से फैलता है।
 
ब्रुकेला प्रजाति धूल, गोबर, पानी, गाढ़े घोल, गर्भपात भ्रूण, मिट्टी, मांस और डेयरी उत्पादों में लंबी अवधि तक जीवित रह सकते हैं।
 
मनुष्य से मनुष्य में संक्रमण बेहद कम होता है।  
 
उष्मायन अवधि अधिक परिवर्तनशील होती है। आमतौर पर उष्मायन अवधि दो से चार सप्ताह होती है, लेकिन एक सप्ताह से दो महीने या उससे अधिक समय तक हो सकती हैं।
 
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निदान 
 
नैदानिक चित्र स्पष्ट नहीं है, इसलिए निदान के लिए प्रयोगशाला परीक्षणों के सहयोग की आवश्यकता होती है।
 
संभावित नैदानिक परीक्षण दो तरह का होता है। पहला- रोज़ बंगाल टेस्ट (आरबीटी) और दूसरा- स्टैंडर्ड एग्लूटीनेशन टेस्ट (एसएटी)।
 
स्क्रीनिंग के लिए रोज़ बंगाल टेस्ट (आरबीटी); यदि संभावित नैदानिक परीक्षण सकारात्मक है, तो नैदानिक पुष्टि परीक्षण के तहत दो परीक्षणों में से एक रोग की पुष्टि के लिए किया जाता है।
 
पुष्टि नैदानिक परीक्षण
 
रक्त या अन्य नैदानिक नमूने से ब्रुकेला प्रजाति को अलग किया जाता है।
 
संभावित प्रयोगशाला नैदानिक परीक्षण एग्लोटिनेटिन्ग एंटीबॉडी (आरबीटी, एसएटी) का पता लगाने पर आधारित है। उनको गैर-एग्लोटिनेटिन्ग एंटीबॉडी का पता लगाने वाले परीक्षण के साथ एलिसा आईजीजी परीक्षण और कूम आईजीजी के माध्यम से किया जाता है।
 
संदर्भ:
 

प्रबंधन
 
एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग संक्रमण का उपचार करने और रोग को दोबारा होने से रोकने के लिए किया जाता है।
 
यदि जटिलताएं हैं, तो उपचार के लंबे कोर्स की आवश्यकता हो सकती है।
 
आगामी उपचार के लिए चिकित्सक से सलाह लें।
 
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रोकथाम 
 
मनुष्य के ब्रुसेलोसिस से बचने का सबसे तर्कसंगत दृष्टिकोण जानवरों में संक्रमण का नियंत्रण और उन्मूलन है।
 
उच्च ज़ोखिम की दर वाले ज़ूनोटिक क्षेत्रों (पशुओं की आबादी में रोग की लगातार उपस्थिति) में बोवाइन ब्रूसीलोसिस के नियंत्रण के लिए पशुओं के टीकाकरण की सिफ़ारिश की जाती है।
 
कम प्रभावित क्षेत्रों में ब्रूसीलोसिस को समाप्त करने का एक उपाय परीक्षण और संक्रमित पशुओं को चुनकर मारना है।
 
लोगों को बिना पाश्चरीकृत दूध एवं उससे बने उत्पादों के सेवन से बचने तथा मांस को पर्याप्त रूप से पकाएं जाने के लिए शिक्षित किया जाना चाहिए।
 
ज़ोखिम से पीड़ित पेशेवरों एवं शिकारियों (कसाईयों, किसानों, वधकर्त्ताओं, पशु चिकित्सकों) के लिए सावधानीपूर्वक संभालना एवं जन्म के समय निकलने वाले पदार्थों (रक्त, गर्भनाल एवं झिल्ली), विशेषकर गर्भपात के मामलों के निपटारन के लिए बचावकारी सावधानियां अपनाना आवश्यक है।
 
संदर्भ:
 
 
 
 

  • PUBLISHED DATE : Apr 26, 2018
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Apr 26, 2018

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