पोस्ट पोलियो सिंड्रोम (पोलियोत्तर संलक्षण)

 
परिचय
 
पोस्ट पोलियोमाइलिटिस सिंड्रोम (पीपीएस) को रोगी के एक्यूट पोलियोमाइलिटिस पक्षाघात के कई सालों के बाद नए तंत्रिका पेशीय लक्षणों की विलंबित उपस्थिति से जाना जाता है। पीपीएस प्रारंभिक पोलियो हमले से उपचारित होने के वर्षों बाद पोलियो से ठीक हुए लोगों (पोलियो के उत्तरजीवी लोगों) को प्रभावित करता है। यह एक्यूट हमले के बाद सामान्यत: 15 वर्ष या उससे अधिक में होता है, लेकिन ज्यादात्तर तीस से चालीस  वर्षों में हो सकता है तथा लगभग पचीस से अठाईस प्रतिशत रोगियों में पाया जाता है। पीपीएस आमतौर पर पोलियो से प्रभावित मांसपेशियों में नयी कमजोरी के रूप में प्रकट होता है। यह कमजोरी चरणबद्ध तरीके से होती है, जिसमें कमजोरी बढ़ती है तथा उसके बाद स्थिरता की अवस्था आ जाती है।
 
संदर्भ:
 
 
 

लक्षण 
 
प्रमुख नैदानिक विशेषताएं नई कमजोरी, मांसपेशीय थकान, सामान्य थकान और दर्द है। सर्दी बरदाश्त न होना, सांस लेने या निकलने में तकलीफ, निद्रा विकार और बिगड़ी क्रियात्मक क्षमताएं भी देखी जाती हैं।
 

कारण
 
जिन लोगों को पहले पोलियो होता है, बाद के वर्षों में उनमें पोस्ट पोलियो सिंड्रोम (पीपीएस) विकसित हो सकता है। जिन लोगों को अत्यधिक गंभीर पोलियो था और जिन्होंने  अधिक क्रियात्मक गतिविधियाँ प्राप्त कर ली, वे पीपीएस से ज़्यादा प्रभावित हो सकते है।
 
हालांकि पीपीएस के कारणों पर बहस हो रही है, सामान्य सिद्धांत यह है, कि यह मेरुदंड में तंत्रिका कोशिकाओं की धीमी गति से कमजोरी के परिणामस्वरुप होता है, जो कि पोलियो वायरस द्वारा क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। कमज़ोर तंत्रिका कोशिकाओं के ज़्यादा काम करने से  पीपीएस हो जाता है। प्रारंभिक पोलियो हमले के बाद पीपीएस के लक्षण दस से चालीस वर्षों में कभी भी दिखाई दे सकते हैं। शुरूआत का औसत समय प्रारंभिक पोलियो हमले के तीस वर्ष बाद होता है।
 
पीपीएस संक्रामक रोग नहीं है- यह एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैल सकता है। पीपीएस से पीड़ित लोग पोलियों उत्पन्न करने वाले वायरस के अन्य हमले को अनुभव नहीं करते है तथा वे अन्य लोगों में पोलियों नहीं फैला सकते है। 
 
 

निदान
 
पीपीएस का पता लगाना मुश्किल है, क्योंकि दिखाई देने वाले लक्षण आमतौर पर गैर-विशिष्ट होते हैं। मुख्यतः इसका पता रोग के अन्य कारणों को हटाकर किया जाता है। आपका चिकित्सक रोग के अन्य कारणों को हटाकर एवं यदि आप निम्नलिखित से पीड़ित है तो उनकी जांच से रोग की पुष्टि कर सकता है: 
 
  • पूर्व पोलियो संक्रमण
  • प्रारंभिक पोलियो हमले के बाद ठीक होने की अवधि, उसके बाद दीर्घकालिक स्थिरता की अवधि। 
  • नयी मांसपेशियों की धीरे-धीरे और लगातार कमजोरी।
  • थकान के बिना या थकान के साथ कम शक्ति।
  • पेशीय अपक्षय (संकुचन) या मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द।
  • लक्षण, जो कि कम से कम एक वर्ष तक रहते हैं।

अपने आप रोग का पता न करें; आपको अन्य परेशानी हो सकती हैं, जो कि आपके लक्षणों का कारण हैं।

प्रबंधन
 
हालांकि पीपीएस के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, अंतर्विषयक प्रबंधन कार्यक्रम लक्षणों को नियंत्रित करने में उपयोगी हो सकता है। पीपीएस में औषधीय उपचार और पुनर्वास प्रबंधन की प्रभावशीलता अभी तक स्थापित नहीं है। परिणाम यह दर्शाते हैं, कि आईवीआईजी, लमोटिग्रीन, मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम और स्थायी चुंबकीय क्षेत्र (स्टैटिक मैग्नेट फील्ड) लाभकारी हो सकते हैं, लेकिन आगे की जांच की आवश्यकता होती है। यथोचित व्यायाम पद्यति के प्रावधान और उपयुक्त चिकित्सा या अर्थोटिक सहयोग के साथ केंद्र बहुआयामी दृष्टिकोण होना चाहिए।
 

  • PUBLISHED DATE : Mar 05, 2018
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Mar 05, 2018

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