खसरा

खसरा बचपन में होने वाला तीव्र और अत्यधिक संक्रामक रोग है, जो कि नाक, मुंह या गले से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से संचारित होता है। यह रोग वायरस के कारण होता है। खसरे को बुख़ार और ऊपरी श्वसन तंत्र में होने वाले लक्षणों जैसे कि खांसी और ठंड (सर्दी-जुकाम) से पहचाना जाता है। खसरे के दाने इसके सूचक है। यह रोग सारे विश्व में पाया जाता है तथा यह बच्चों में मुख्यत: रुग्णता एवं मृत्यु को पैदा करता है।
 
संदर्भ: 

खसरे के प्रारंभिक संकेत और लक्षण चार से छह दिनों के  बुख़ार के साथ खांसी, आँख आना, सर्दी-ज़ुकाम होते है, जिन्हें अंग्रेज़ी में तीन सी से जाना जाता है।
  • खांसी।
  • नेत्रश्लेष्मलाशोथ (लाल आंखें)।
  • सर्दी-ज़ुकाम ।
  • सर्दी जैसे लक्षण- नाक बहना, आँख से पानी बहना, पलकों की सूजन और छींके आना है। 
  • तापमान हल्के से गंभीर हो जाता है, जो कि बहुत दिनों के लिए  40°C (105°F) तक पहुंच सकता है। फिर तापमान कम हो जाता है, लेकिन जब दाने प्रकट होता है तब तापमान दोबारा बढ़ जाता है। 
  • थकान, चिड़चिड़ापन और सामान्यत: ऊर्जा की कमी।
  • दर्द एवं पीड़ा।
  • अपर्याप्त भूख।
  • मुंह और गले में छोटे भूरे-सफेद धब्बे (कोप्लिक्स के धब्बे कहा जाता है)। 
संदर्भ:

खसरा श्वसन प्रणाली में वायरस विशेषत: मोर्बिलीवायरस के जीन्स पैरामिक्सोवायरस के संक्रमण के कारण होता है। मोर्बिलीवायरस भी अन्य पैरामिक्सोवायरसों की तरह ही एकल असहाय, नकारात्मक भावना वाले आरएनए वायरसों द्वारा घिरे होते हैं। मनुष्य खसरे के वायरस को प्रसारित करने का प्राकृतिक स्रोत हैं।
 

खसरे का पता लगाने के लिए कम से कम तीन दिनों के बुख़ार के साथ तीन में से एक चीज़ (खांसी, सर्दी-जुकाम, नेत्रश्लेष्मलाशोथ (लाल आंखें)) की जानकारी जानने की आवश्यकता होती है।
  • खसरे के निदान के लिए कॉपलिक के धब्बों का अवलोकन किया जाता हैं। 
संदर्भ: 

खसरे के लिए कोई विशेष उपचार नहीं है। खसरे की गैर-जटिलताओं से पीड़ित अधिकांश रोगी सहायक उपचार और पर्याप्त आराम से ठीक हो जाते हैं। 
 
निम्नलिखित के माध्यम से राहत के लक्षण हो सकते है:
  • एसिटामिनोफेन (टाईलिनोल)।
  • पर्याप्त आराम। 
  • नम दवा।

हालांकि, यदि रोगी अधिक बीमार हो जाता है तथा उनमें जटिलताओं का विकास हो जाता है, तो चिकित्सीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

संदर्भ:

खसरे को (खसरा, कण्ठमाला और रूबेला) एमएमआर वैक्सीन बोले जाने वाले टीकाकारण के माध्यम से रोका जा सकता है। खसरे की रोकथाम में नियमित टीकाकरण अत्यधिक प्रभावी है।
 
खसरे के टीकाकरण में दो खुराकें शामिल हैं। टीकाकरण की पहली ख़ुराक 12 से 15 महीने की अवस्था के बीच तथा दूसरी ख़ुराक 4 सप्ताह के अंतराल के बाद दी जाती है। आमतौर पर यह खुराक 4 से 6 वर्षों की अवस्था तक भी दी जा सकती हैं।
 
हालांकि, भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण समय-सारणी के अनुसार 'खसरे की पहली ख़ुराक 9 से 12 महीने की अवस्था तथा दूसरी ख़ुराक 16 से 24 महीने की अवस्था में डीपीटी (डिप्थीरिया, टिटनेस और काली खांसी) बूस्टर खुराक के साथ 5 साल की उम्र तक दी जा सकती है।
 
संदर्भ: 
 

  • PUBLISHED DATE : Aug 05, 2016
  • PUBLISHED BY : Zahid
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Aug 05, 2016

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