कुष्ठ रोग

परिचय 
कुष्ठ रोग को हैनसेन रोग (एचडी) के नाम से भी जाना जाता है। यह रोग माइकोबैक्टीरियम (माइकोबैक्टीरियम लेप्री) के कारण होने वाला क्रोनिक संक्रामक रोग है। यह रोग विशेष रूप से त्वचा और अंदरुनी  तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है। इस रोग को ग्रंथि या धब्बे के गठन द्वारा पहचाना जाता है। यह रोग असंवेदनशीलता और मांसपेशी की क्षति तथा शारीरिक विकृति का विस्तार और प्रसारण करता हैं। अंतत: यह रोग पक्षाघात को भी पैदा करता हैं। इस रोग को हैनसेन रोग कहा जाता है। इस रोग का संक्रमण माइकोबैक्टीरियम लेप्री और माइकोबैक्टीरियम लेप्रोमेटॉसिस बैक्टीरिया के कारण होता है। यह मुख्यतः ऊपरी श्वसन तंत्र की श्लेष्मल झिल्ली और बाह्य नसों की ग्रैन्युलोमा-संबंधी रोग है। इस रोग के प्राथमिक बाह्य संकेत त्वचा पर घाव हैं। यदि कुष्ठ रोग का उपचार न किया जाएँ, तो यह रोग बढ़ सकता है। इस रोग के कारण त्वचा, नसों, हाथ-पैरों और आंखों की स्थायी क्षति हो सकती है।
 
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम।  
 
 
संदर्भ:
 

लक्षण 
कुष्ठ रोग के निम्नलिखित लक्षण हो सकते है:
  • त्वचा पर फीके/बेरंग घाव हो सकते है। 
  •  त्वचा पर जमाव। 
  •  मोटी, कड़ी या सूखी त्वचा। 
  • गंभीर दर्द। 
  • त्वचा के प्रभावित हिस्सों पर अकड़न। 
  • मांसपेशियों में कमजोरी या पक्षाघात (विशेष रूप से हाथों और पैरों पर)। 
  • आंखों की समस्या अंधेपन को पैदा कर सकती है। 
  • बढ़ी हुई तंत्रिकाएं (विशेष रूप से कोहनी और घुटने के आसपास) हो सकती है।
  • नाक भरी होना । 
  • पैरों के तलवों पर अल्सर हो सकता है।
संदर्भ:
 

कारण
कुष्ठ रोग के उद्भव का कार्योत्पादक एजेंट माइकोबैक्टीरियम लेप्री और माइकोबैक्टीरियम लेप्रोमेटॉसिस है। माइकोबैक्टीरियम एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। कुष्ठ रोग का बैक्टीरिया खांसने और छींकने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में प्रसारित हो सकता है। यह हवा में संक्रमित बूंदों के माध्यम से पहुँचता है। यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की नाक के तरल पदार्थ (इसे स्राव के रूप में भी जाना जाता है) के संपर्क में आता है, तो वह बैक्टीरिया से संक्रमित हो सकता है। 
 
ज़ोखिम के कारण: इस रोग से पीड़ित होने का ज़ोखिम अस्वच्छ स्थानीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अधिक होता है, जैसे कि:
  • अपर्याप्त बिस्तर। 
  • दूषित पानी। 
  • प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी अपर्याप्त आहार की समस्याएं या अन्य समस्याएं। 
संदर्भ: 
 

निदान 
कुष्ठ रोग का निदान नैदानिक लक्षणों और संकेतों पर आधारित होता है।
 
लेप्रोमिन परीक्षण:
  • सकारात्मक त्वचा स्मीयर। 
  • कुष्ठ रोग में निश्चित असंवेदनशीलता या जमाव और जमाव के बिना तंत्रिकाओं की त्वचा पर लगातार घाव होते है।
यदि किसी व्यक्ति को कुष्ठ रोग से पीड़ित होने का संदेह होता है, तो स्त्री/पुरुष दोनों को निदान और उपचार के लिए चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
 
संदर्भ:

प्रबंधन 
बहुत सारे लेप्रोस्टैटिक एजेंट उपचार के लिए उपलब्ध हैं। डब्ल्यूएचओ द्वारा मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) की सिफ़ारिश की गयी हैं:
 
मल्टी बैसीलरी (एमबी) कुष्ठ रोग: मल्टी बैसीलरी (एमबी) कुष्ठ रोग से पीड़ित वयस्कों के लिए मानक संयोजक दवाओं का उपयोग किया जाता है। 
 
राइफैम्पिसिन: एक महीने में ६०० मिलीग्राम डैप्सोन: १०० मिलीग्राम प्रतिदिन। 
 
क्लोफैज़िमाइन: एक महीने में ३०० मिलीग्राम और ५० मिलीग्राम प्रतिदिन। 
 
अवधि = बारह महीने। 
 
पॉसिबैसीलरी (पीबी) कुष्ठ रोग: पॉसिबैसीलरी (पीबी) कुष्ठ रोग से पीड़ित वयस्कों के लिए मानक संयोजक दवाओं का उपयोग किया जाता है। 
 
राइफैम्पिसिन : एक महीने में ६०० मिलीग्राम। 
 
डैप्सोन : १०० मिलीग्राम प्रतिदिन। 
 
अवधि = बारह महीने। 
 
एकल त्वचा घाव पॉसिबैसीलरी कुष्ठ रोग: इस रोग से पीड़ित वयस्कों के लिए मानक संयोजक दवाओं की एकल ख़ुराक का उपयोग किया जाता है। 
 
राइफैम्पिसिन: ६०० मिलीग्राम। 
 
ओफ़्लॉक्सासिन: 400 मिलीग्राम। 
 
माइनोसाइक्लाइन: १०० मिलीग्राम। 
 
यदि किसी व्यक्ति को कुष्ठ रोग से पीड़ित होने का संदेह होता है, तो स्त्री/पुरुष दोनों को निदान और उपचार के लिए चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
 
संदर्भ:

रोकथाम 
 
बीसीजी का टीका तपेदिक के अलावा कुष्ठ रोग के खिलाफ़ कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है। यह टीका कुष्ठ रोग से सुरक्षा प्रदान करने में पचीस प्रतिशत प्रभावी होता है, लेकिन इस टीके की एक ख़ुराक की तुलना में दो ख़ुराक ज़्यादा प्रभावी होती है। अधिक प्रभावी टीके को बनाने के लिए अभी काम चल रहा है।
 

  • PUBLISHED DATE : Apr 01, 2016
  • PUBLISHED BY : Zahid
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Apr 01, 2016

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