उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)

परिचय
 
उच्च रक्तचाप को उच्च या बढ़े हुए रक्तचाप से भी जाना जाता है। इस स्थिति में रक्त वाहिकाओं में लगातार दबाव बढ़ जाता है। रक्त हृदय से शरीर के सभी भागों में रक्त वाहिकाओं के माध्यम से प्रवाहित होता है। हर बार हृदय धड़कता है, यह धमनियों के माध्यम से रक्त को शरीर में पंप (पहुंचाता) करता है। रक्तचाप रक्त वाहिकाओं (धमनियों) की दीवारों के खिलाफ़ रक्त के दबाव से निर्मित होता है, क्योंकि इसे हृदय से पंप किया जाता है। यदि रक्त वाहिकाओं में दबाव अधिक होता है, तो हृदय को रक्त पंप में अधिक काम करना पड़ता है। यदि इसे अनियंत्रित छोड़ दिया जाएं, तो उच्च रक्तचाप हृदयाघात, हृदय की मांसपेशियों में वृद्धि और हृदय विफलता उत्पन्न कर सकता है। रक्त वाहिकाओं में उच्च दबाव के कारण सूजन (धमनीविस्फार) और हल्के धब्बे विकसित हो सकते हैं, जिससे अवरोधक (क्लाग) और टूटन की संभावना अधिक होती है। रक्त वाहिकाओं में दबाव के कारण मस्तिष्क में रक्त का रिसाव भी हो सकता है। इसके कारण स्ट्रोक हो सकता है। उच्च रक्तचाप के कारण गुर्दे की विफलता, अंधापन, रक्त वाहिकाओं का टूटना और संज्ञानात्मक हानि भी हो सकती है।
 
रक्तचाप मर्करी (पारा) रक्तचापमापी की मिलीमीटर (mm Hg) में मापा जाता है तथा आमतौर पर एक नंबर को दूसरे नंबर से तिर्यक (एक के नीचे दूसरे को) लिखा जाता है। रक्तचाप को दो माप में मापा जाता है। पहला उच्च नंबर सिस्टोलिक रक्तचाप है- जिसे ‘जब ह्रदय में संकुचन या धड़कन बढ़ जाती है तब रक्त वाहिकाओं में उच्च दवाब होता है’ से परिभाषित किया जाता है। दूसरा निम्न नंबर डायस्टोलिक रक्तचाप है- जिसे ‘जब हृदय की मांसपेशियों को आराम मिलता है, तब रक्त वाहिकाओं में निम्न दवाब होता है’ से परिभाषित किया जाता है।  सामान्यत: रक्तचाप को सिस्टोलिक रक्तचाप 120mm Hg और डायस्टोलिक रक्तचाप 140mm Hg से परिभाषित किया जाता है। 
 
उच्च रक्तचाप को सिस्टोलिक रक्तचाप 140mm Hg के बराबर या उससे अधिक और/या डायस्टोलिक रक्तचाप 90mm Hg के बराबर या उससे अधिक के रूप में परिभाषित किया जाता है।
 
विश्व में पांच में एक वयस्क का रक्तचाप बढ़ा है- यह स्थिति स्ट्रोक और हृदय रोग से होने वाली आधी मृत्यु का कारण है। प्रतिवर्ष विश्वभर में उच्च रक्तचाप की जटिलताओं के कारण नौ दशमलव चार मिलियन लोगों की मृत्यु हो जाती है।
 
लगभग सभी उच्च-आय वाले देशों में, कम लागत वाली दवाओं के साथ व्यापक निदान और उपचार से समस्त जनसंख्या के उच्च रक्तचाप के साथ-साथ औसत रक्तचाप में महत्वपूर्ण कमी आयी है। इसने हृदय रोग से होने वाली मृत्यु को कम करने में योगदान दिया  है। उदाहरण के लिए वर्ष 2014 में अमेरिका के डब्ल्यूएचओ क्षेत्र में रक्तचाप की व्यापकता वर्ष 1980 में 31% की तुलना में 18% थी।  
 
इसके विपरीत निम्न आय वाले देशों में उच्च रक्तचाप की प्रधानता है। डब्ल्यूएचओ के अफ्रीकी क्षेत्रों के कई देशों में तीस प्रतिशत से अधिक वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित है। यह अनुपात बढ़ रहा है तथा इस क्षेत्र में औसत रक्तचाप का स्तर वैश्विक औसत रक्तचाप की तुलना में काफी अधिक हैं।
 
विकासशील देशों में उच्च रक्तचाप से पीड़ित कई लोग अपने रोग के बारे में जागरूक नहीं हैं। जिन लोगों में रोग पाया गया है, उनके पास उपचार की पहुंच उपलब्ध नहीं है तथा वे लंबे समय तक अपने रोग को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होते है। इस स्थिति ने हृदय रोग, स्ट्रोक और गुर्दें की विफलता और समय से पहले होने वाली मृत्यु दर और विकलांगता के भार में योगदान दिया है।
 
उच्च रक्तचाप का निदान, उपचार एवं नियंत्रण विश्वभर में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्राथमिकता है।
 
संदर्भ:
 
 
 

लक्षण 
 
उच्च रक्तचाप से पीड़ित अधिकांश लोगों में कोई लक्षण नहीं होते हैं; इसलिए इसे साइलेट किलर के नाम से भी जाना जाता है।
 
कभी-कभी उच्च रक्तचाप के कारण सिरदर्द, सांस की तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हृदय की धड़कन बढ़ना और नाक बहना जैसे लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, लेकिन उच्च रक्तचाप को सूचित करने के लिए इनका आश्रय लिया जा सकता है।
 
उच्च रक्तचाप गंभीर चेतावनी संकेत है, जो कि यह दर्शाता है, कि जीवन शैली में बदलाव महत्वपूर्ण है। 
 
संदर्भ:
 

कारण
 
उच्च रक्तचाप को प्राथमिक (मूलभूत) उच्च रक्तचाप तथा द्वितीयक उच्च रक्तचाप दो रूपों में वर्गीकृत किया गया है। 
 
प्राथमिक या मूलभूत उच्च रक्तचाप: जब अंतर्निहित कारण को निर्धारित नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार के उच्च रक्तचाप को "प्राथमिक मूलभूत रक्तचाप" कहा जाता है। यह उच्च रक्तचाप के वयस्क मामलों में 90-95% पाया जाता है। यह कुछ जोखिम वाले कारकों से जुड़ा है। यह पर्यावरण या आनुवंशिक कारणों के परिणामस्वरूप विकसित हो सकता है। मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग में आनुवंशिक घटक भी होते है तथा ये उच्च रक्तचाप में योगदान देते है।
 
द्वितीयक उच्च रक्तचाप: जब उच्च रक्तचाप के कारण को प्रत्यक्ष पहचान लिया जाता है। इस स्थिति को माध्यमिक उच्च रक्तचाप कहा जाता है।
 
उच्च रक्तचाप के लगभग 2-10% मामले अंतर्निहित स्थिति या निम्नलिखित के कारण होते हैं, जैसे कि-
  • रीनल पैरेन्काइमा रोग (2.5-6%),
  • संवहनी कारण (.2-4%),
  • एंडोक्राइन कारण (1-2%)
  • एक्सोजनस/बहिर्जात (स्टेरॉयड लेना, मौखिक गर्भनिरोधक का उपयोग),
  • एंडोजनस/अंतर्जात (प्राथमिक हाइपरएल्डोस्टीरोइस्म, कशिंग सिंड्रोम, फीयोक्रोमोसाइटोमा, कंजेनिटल एड्रेनल ह्यपरप्लासिया,
  • ड्रग्स एवं टॉक्सिंस (अल्कोहल, कोकेन, गैर-स्टेरायडल एंटी-इन्फ्लोमैट्री ड्रग्स (एनएसएआईडी), निकोटीन, डिकन्जेस्टेंट कंटेनिंग एफ़ेडरीने, लीकोरिस या एफ़ेडरीने कंटेनिंग हर्बल रेमेडीज़)।
अन्य कारणों में गर्भावस्था के कारण उच्च रक्तचाप, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया शामिल हैं।
 
उच्च रक्तचाप विकसित होने वाले ज़ोखिम के कारक निम्नलिखित हैं:
 
गैर-परिवर्तनीय ज़ोखिम के कारक:
 
  • पारिवारिक इतिहास: उच्च रक्तचाप परिवार में पहले से चला आ रहा हैं।
  • बढ़ती उम्र: उम्र के साथ उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है।
  • लिंग: युवा और मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों में उच्च रक्तचाप बेहद सामान्य है, जबकि आधे से ज़्यादा महिलाएं रजोनिवृत्ति के बाद होने वाले परिवर्तन के कारण जीवन में उच्च रक्तचाप से पीड़ित होती है।
 
परिवर्तनीय ज़ोखिम के कारक:
  • शारीरिक गतिविधियों में कमी।
  • अस्वास्थ्यकर आहार। अत्यधिक नमक और वसा युक्त आहार का सेवन तथा पर्याप्त मात्रा में फल व सब्जियां न खाना। 
  • अत्यधिक वज़न और मोटापा।
  • ज़्यादा और अत्यधिक अल्कोहल का उपभोग।
  • संभावित योगदान के कारक। ख़राब तनाव प्रबंधन, धूम्रपान और पैसिव स्‍मोकिंग (निष्क्रिय धूम्रपान) यानी सेकेंड हैंड स्‍मोकिंग, स्लीप एपनिया।
  • पूर्व-उच्च रक्तचाप (सामान्य से थोड़ा अधिक रक्तचाप) भविष्य में उच्च रक्तचाप के विकास के ज़ोखिम को बढ़ाता है।
  • मधुमेह (डायबिटीज मेलिटस)। मधुमेह से पीड़ित लगभग साठ प्रतिशत लोगों को उच्च रक्तचाप भी होता है।

 

  रक्तचाप का स्तर

           सामान्य

सिस्टोलिक (उच्चतम-रीडिंग): 120 mmHg से भी कम
 
डायस्टोलिक  (निचली-रीडिंग): 80 mmHg से भी कम

ज़ोखिम (पूर्व-उच्च रक्तचाप) 

सिस्टोलिक: 120-139 mmHg 
 
डायस्टोलिक: 80-89 mmHg 

         उच्च

सिस्टोलिक: 140 mmHg या अधिक
 
डायस्टोलिक: 90 mmHg या अधिक

 

संदर्भ:
 
 
 
 
पार्क द्वारा निवारक और सामाजिक चिकित्सा का 22वें संस्करण, उच्च रक्तचाप, पृष्ठ: 345-348 

 

 

 

निदान 
 
सभी वयस्कों को अपने रक्तचाप के स्तर के बारे में जानकारी रखनी चाहिए। ऐसे कई प्रकार के डिवाइस होते हैं, जिनका उपयोग रक्तचाप मापने के लिए किया जाता हैं। ये इलेक्ट्रॉनिक, मर्करी और एनेरोइड डिवाइस होते हैं।
  • डब्ल्यूएचओ किफ़ायती एवं विश्वसनीय इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करने की सिफ़ारिश करता है, जिनमें हाथ से रीडिंग्स चयन करने का विकल्प होता है। जब बैटरियां बंद हो जाती हैं, तब अर्ध-स्वचालित उपकरण हाथ से रीडिंग लेने में सक्षम होता हैं। 
  • डब्ल्यूएचओ सिफ़ारिश करता है, कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (मर्करी एक टॉक्सिक पदार्थ है) के पक्ष में मर्करी डिवाइस को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना चाहिए। 
  • ऐनरॉइड उपकरण जैसे कि रुधिरदाबमापी/रक्तचापमापी (स्फीगमोमैनोमीटर) का उपयोग किया जा सकता है। यह उपकरण जांच के सही परिणाम प्रदर्शित कर रहा है, इसकी जांच के लिए हर छह महीनों में चिकित्सक या अन्य उपकरण पर रक्तचाप की जांच की जानी चाहिए तथा दोनों परिणामों की तुलना की जानी चाहिए। उपयोगकर्ताओं को इन उपकरणों से रक्तचाप मापने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
 
उच्च रक्तचाप के निदान से पहले कई दिनों तक रक्तचाप माप को रिकार्ड किया जाना चाहिए। रक्तचाप को दिन में दो बार सामान्यत: सुबह और शाम में रिकार्ड किया जाता है। 
बैठे व्यक्ति के कम से कम एक मिनट के अंतराल पर लगातार दो माप लिये जाते हैं। पहले दिन लिए गए माप को छोड़ दें और उच्च रक्तचाप के निदान की पुष्टि करने के लिए सभी बचे मापों के औसत मूल्य को लिया जाता है।
 
चिकित्सा शुरू करने से पहले नियमित प्रयोगशाला परीक्षणों की भी सिफ़ारिश की जाती है। इनमें इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम; मूत्र विश्लेषण; रक्त ग्लूकोज और हेमेटोक्रिट; सीरम पोटेशियम, क्रिएटिनिन (या अनुमानित ग्लोमेर्युलर फिल्ट्रेशन रेट [जीएफआर]), कैल्शियम; और नौ से बारह घंटे के अनाहार के बाद लिपिड प्रोफाइल किया जाता है, जिसमें उच्च घनत्व वाला लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल और कम घनत्व वाला लेपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स शामिल हैं।
 
डिजिटल रक्तचाप माप मशीनों का उपयोग क्लिनिक के बाहर किया जा सकता है। जहां माप उपकरण सस्ते हैं और भौगोलिक, भौतिक या आर्थिक कारणों से स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच है, वहां रोगियों को उच्च रक्तचाप के प्रबंधन के लिए रक्तचाप की स्व-निगरानी करने की सिफ़ारिश की जाती है।
 
संदर्भ:
 
 
 

प्रबंधन
 
सभी वयस्कों को अपने रक्तचाप की नियमित जांच रखनी चाहिए। यदि रक्तचाप अधिक है, तो उन्हें स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता की सलाह लेनी चाहिए।
 
कुछ लोगों के लिए जीवन शैली बदलाव रक्तचाप नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त हैं। दूसरों के लिए ये जीवन शैली बदलाव अपर्याप्त हैं तथा उन्हें रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए चिकित्सक द्वारा प्रस्तावित दवा की आवश्यकता होती है।
 
जीवन शैली उपाय:
  • नमक में कमी। प्रतिदिन पांच ग्राम से कम नमक का सेवन (आमतौर पर नमक का सेवन नौ से बारह ग्राम प्रतिदिन होता है) करना।
  • अल्कोहल का सीमित सेवन। 
  • फल और सब्जियों एवं कम वसा युक्त आहार का अधिक उपभोग। 
  • वज़न कम करना तथा इसे बनाए रखना। 
  • नियमित व्यायाम। उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगियों के लिए सप्ताह में पांच से सात दिन कम से कम तीस मिनट मध्यम-तीव्र गतिशील एरोबिक व्यायाम (चलना, जॉगिंग, साईकिल चलाना या तैराकी) करना। 
  • धूम्रपान और अन्य तंबाकू उत्पादों का उपभोग छोड़ना।
उच्च रक्तचाप को रोकने के लिए आहार दृष्टिकोण (डीएएसएच): डीएएसएच आहार योजना के लिए विशेष आहार की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय यह दैनिक एवं साप्ताहिक पोषण संबंधी लक्ष्य प्रदान करता है। इसलिए इस आहार योजना की सिफ़ारिश की जाती है:
  • फल व सब्जियों और साबुत अनाज खाना।
  • इसमें वसा रहित या कम वसा वाले डेयरी उत्पाद, मछली, मुर्गी/पोल्ट्री, फलियां, मेवा और वनस्पति तेल शामिल हैं।
  • संतृप्त वसा से भरपूर आहार जैसे कि वसायुक्त मांस, कुल  वसा (टोटल वसा) युक्त दुग्ध उत्पादों और नारियल, पाम कर्नेल (ताड़ की गरी का तेल) एवं ताड़ जैसे ट्रॉपिकल ऑयल से बचाव।
  • शर्करा-मीठे पेय पदार्थों एवं मिठाईयों का कम से कम मात्रा में उपभोग।
  • डैश आहार योजना अपनाते समय निम्नलिखित आहार का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है:
  •  संतृप्त और ट्रांस वसा में कमी। 
  • पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, रेशा और प्रोटीन से भरपूर आहार का उपभोग।
  • सोडियम का कम उपभोग।
एंटीहाइपरटेंसिव (दवा, जो कि उच्च रक्तचाप को कम करती है) दवाएं: एंटीहाइपरटेंसिव दवाएं (बी.पी. कम करने वाली दवाएं) कई तरीकों जैसे कि शरीर से अतिरिक्त नमक और तरल को निकालने, दिल की धड़कन को धीमा करने या रक्त वाहिकाओं को शिथिल एवं फैलाने के माध्यम से कार्य करती हैं। रक्तचाप को कम करने वाली दवाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
 
डाइयुरेटिक/मूत्रवर्धक औषधी (पानी या तरल गोलियां): शरीर से अतिरिक्त सोडियम को निकालती है, जो कि रक्त में तरल की मात्रा को भी कम करती है तथा आपके रक्तचाप को कम करने में मदद करती है।
 
बीटा अवरोधक: कम शक्ति के साथ हृदय को धीमा धड़ने में मदद करता है। परिणामस्वरूप, हृदय रक्त वाहिकाओं के माध्यम से कम रक्त पंप करता है, जो कि रक्तचाप को कम करने में मदद करता है।
 
एंजियोटेनसिन-कंवर्टिंग एंजाइम (एसीई) इन्हिबिटर्स: एंजियोटेनसिन-II एक हार्मोन है, जो कि रक्त वाहिकाओं को संकरा बनाता है और रक्तचाप को बढ़ता है। एसीई एंजियोटेनसिन I को एंजियोटेनसिन II में बदलता हैI एसीई इनहिबिटर इस प्रक्रिया को बाधित करता है, जो कि एंजियोटेनसिन II के उत्पादन को रोकती है, जिससे रक्तचाप कम होता है।
 
एंजियोटेनसिन II रिसेप्टर ब्लॉकर्स (एआरबी): ये दवाएं रक्त वाहिकाओं में रिसेप्टर्स के साथ एंजियोटेनसिन II हार्मोन को जुड़ने से रोकती है। जब एंजियोटेनसिन II रुक जाता है, तब रक्त वाहिकाएं संकुचित या संकरी नहीं होती है, जो कि आपके रक्तचाप को कम करती है।
 
कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स: यह कैल्शियम को हृदय और रक्त वाहिकाओं की दीवारों में प्रवेश करने से रोकता हैं। यह रक्त वाहिकाओं को शिथिल करता है, जो कि रक्तचाप को कम करता है।
 
अल्फा ब्लॉकर्स: यह रक्त वाहिकाओं को कसने और संकीर्ण करने वाले तंत्रिका आवेगों को कम करता है। जिससे रक्त का प्रवाह आसानी से होने लगता है, जिसके कारण रक्तचाप घटता है।
 
अल्फा-बीटा ब्लॉकर्स: यह तंत्रिका आवेग को कम करता है तथा दिल की धड़कन को भी धीमा करता है। जिसके परिणामस्वरुप, रक्तचाप कम हो जाता है। 
 
सेंट्रल एक्टिंग एजेंट: ये दवाएं तंत्रिका संकेतों को कम करने के लिए मस्तिष्क में कार्य करती है। ये तंत्रिका संकेत रक्त वाहिकाओं को संकरा करती है।  सेंट्रल एक्टिंग एजेंट रक्तचाप को कम करती हैं।
 
वाहिकाविस्फारक (वासोडिलेटर्स): रक्तवाहिकाओं की दीवारों में मांसपेशियों को शिथिल करता है, जो कि रक्तचाप को कम करता है।
 
संदर्भ:
 
 
 
 
 

जटिलताएं
 
जब उच्च रक्तचाप लंबे समय तक रहता है, तो यह शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है तथा जटिलताओं का कारण बन सकता है।
 
कुछ सामान्य जटिलताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
 
  • हृदय। बाएं निलय हाइपरट्रॉफी/बाएं वेंट्रिकल हायपरट्रॉफी, एनजाइना/ प्रीवियस मायोकार्डियल इन्फेक्शन और हृदय विफलता।
  • मस्तिष्क। स्ट्रोक या ट्रांसिएंट इस्कीमिक अटैक, डिमेंशिया (मनोभ्रंश)।
  • क्रोनिक किडनी डिजीज/दीर्घकालिकगुर्दा रोग।
  • पेरिफेरल वैस्कुलर रोग/परिधीय धमनी रोग, धमनी विस्फार/ऐन्यरिज़म।
  • रेटिनोपैथी।
  • संज्ञानात्मक परिवर्तन।
यदि उच्च रक्तचाप का जल्दी पता लग जाता है, तो दवा और स्वस्थ व्यवहार अपनाकर हृदयाघात (हार्ट अटैक), हृदय विफलता (हार्ट फेल), स्ट्रोक और किडनी विफलता के ज़ोखिम को कम किया जा सकता है।
 
संदर्भ:
 

रोकथाम 
 
प्राथमिक रोकथाम:
 
हर व्यक्ति उच्च रक्तचाप के विकास की संभावना और इसके प्रतिकूल परिणाम को कम करने के लिए पांच ठोस कदम अपना सकता है। इसे प्राथमिक रोकथाम कहा जाता है। इसमें शामिल है:
 
1. स्वस्थ आहार
  • शिशुओं और युवाओं के लिए उचित पोषण पर जोर देने के साथ स्वस्थ जीवन शैली को प्रोत्साहित करना; 
  • प्रतिदिन पांच ग्राम से कम नमक (एक चम्मच से कम) खाना;
  • दिन में पांच बार फल एवं सब्जियों का सेवन करना। 
  • संतृप्त और कुल वसा (टोटल फैट) का सेवन कम करना। 
2. अल्कोहल के प्रभाव से बचाव:
  • अल्कोहल के हानिकारक उपयोग से बचें तथा अल्कोहल की एक निर्धारित मात्रा से ज़्यादा न पीयें।  
 
3. शारीरिक गतिविधि:
 
  • नियमित शारीरिक गतिविधियां करें तथा बच्चों और युवाओं को   (प्रतिदिन कम से कम तीस मिनट सप्ताह में पांच दिन) शारीरिक गतिविधियां करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • शरीर के सामान्य वज़न को बनाएं रखना: अधिकतम प्रति पांच किलो वज़न कम करना, दो से दस अंक तक सिस्टोलिक रक्तचाप को कम कर सकता है।
4.  तंबाकू छोड़ना:
  • तंबाकू उपयोग छोड़ना और तंबाकू उत्पादों के संपर्क से बचाव।
 
5. स्वस्थ उपाय:
  • स्वस्थ उपायों जैसे कि ध्यान, उचित शारीरिक व्यायाम और सकारात्मक सामाजिक संपर्क के माध्यम से तनाव प्रबंधन करना।
 
द्वितीयक रोकथाम:  द्वितीयक रोकथाम का लक्ष्य पीड़ित व्यक्ति में उच्च रक्तचाप का पता लगाना और उसे नियंत्रण करना है, जिसके फलस्वरूप जटिलताओं का ज़ोखिम कम हो जाता है। 
 
रक्तचाप की नियमित जांच से रोग का जल्दी पता लगाना- यदि उच्च रक्तचाप का जल्दी पता लग जाता है, तो हृदयाघात (हार्ट अटैक), हृदय विफलता (हार्ट फेल), स्ट्रोक और किडनी विफलता के ज़ोखिम को कम किया जा सकता है। स्व-देखभाल उच्च रक्तचाप का शीघ्र पता लगाने, दवा और स्वस्थ व्यवहार अपनाने, बेहतर नियंत्रण एवं जब आवश्यक हों, तब चिकित्सा सलाह मांगने के महत्व के बारे में जागरूक करने में मदद कर सकता है।
 
स्व-देखभाल सभी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह विशेषकर ऐसे लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके पास भौगोलिक, भौतिक या आर्थिक कारणों की वज़ह से स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच है।
 
उपचार- उपचार का उद्देश्य 140/90 mmHg से कम रक्तचाप प्राप्ति होनी चाहिए तथा आदर्शत: रक्तचाप 120/80 mmHg  है। रोगियों, परिवारों और समुदायों की शिक्षा के माध्यम से रोगी अनुपालना (दवाई खाने, आहार संहिता का पालन करने एवं अन्य जीवन शैली बदलाव) में सुधार किया जाना चाहिए।
 
संदर्भ:
 
 
पार्क द्वारा निवारक और सामाजिक चिकित्सा का 22वें संस्करण, उच्च रक्तचाप, पृष्ठ: 345-348 

  • PUBLISHED DATE : Jul 12, 2018
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Jul 12, 2018

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