ल्यूकेमिया

ल्यूकेमिया
 
परिचय
 
ल्यूकेमिया सफ़ेद रक्त कोशिकाओं या बोन-मेरो का कैंसर है।  अस्थि मज्जा (बोन-मेरो) (शरीर की अस्थियों के बीच का वह मुलायम और स्पंजी भाग है, जहां रक्त बनता है) में सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की संख्या असामान्य रूप से बढ़ती हैं, जहां रक्त कोशिकाओं का उत्पादन होता हैं। संख्या में बढ़ने वाली असामान्य सफ़ेद कोशिकाएं अपरिपक्व होती हैं और उन्हें "ब्लास्ट (विस्फोट)" कहा जाता है।
 
ल्यूकेमिया दो प्रकार का होता हैं:
 
एक्यूट ल्यूकेमिया: एक्यूट ल्यूकेमिया को अपरिपक्व रक्त कोशिकाओं में तीव्र वृद्धि से पहचाना जाता है। अस्थि मज्जा (बोन-मेरो) में अपरिपक्व रक्त कोशिकाओं की तीव्र वृद्धि और जमाव स्वस्थ रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को असमर्थ बनाता है। ये तीव्र वृद्धि और जमाव स्वस्थ रक्त कोशिकाओं के विकास में भी बाधक बनता हैं। एक्यूट ल्यूकेमिया में तेज़ी से अपरिपक्व रक्त कोशिकाओं की तीव्र वृद्धि और जमाव के कारण तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है, जो कि फिर रक्तप्रवाह में मिल जाती है और शरीर के अन्य अंगों में फैल जाती है। बच्चों में ल्यूकेमिया का सबसे सामान्य प्रकार एक्यूट ल्यूकेमिया है।
 
क्रोनिक ल्यूकेमिया: क्रोनिक ल्यूकेमिया की पहचान अपेक्षाकृत परिपक्व, लेकिन फिर भी असामान्य, सफ़ेद रक्त कोशिकाओं में वृद्धि के रूप में की जाती है। आमतौर पर इन्हें विकसित होने में महीनों या वर्षों का समय लग सकता है। इन कोशिकाओं का निर्माण सामान्य कोशिकाओं की अपेक्षा अधिक मात्रा में होता है। इसके परिणामस्वरूप रक्त में अनेक असामान्य श्वेत रक्त कोशिकाएं उत्पन्न हो जाती हैं। इन कोशिकाओं को विकसित होने में महीनों या वर्षों का समय लग सकता है।
 
एक्यूट ल्यूकेमिया का तुरंत उपचार किया जाना चाहिए। जबकि क्रोनिक (दीर्घकालिक) रूपों की चिकित्सा की अधिकाधिक प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए उनका कभी-कभी कुछ समय तक निरीक्षण किया जाता है। क्रोनिक (दीर्घकालिक) श्वेतरक्तता अधिकांशतः वृद्ध लोगों में पाई जाती है, लेकिन सैद्धांतिक रूप से यह किसी भी आयु वर्ग में हो सकती है। ल्यूकेमिया उपचार योग्य रोग है। अधिकांश उपचार में कीमोथेरेपी, मेडिकल रेडिएशन थेरेपी या हार्मोनल उपचार शामिल हैं।
 
संदर्भ: 
 
 
 
 
 
 

लक्षण
 
एक्यूट ल्यूकेमिया के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
 
त्वचा का पीलापन। 
 
थकान।
 
असामान्य और लगातार रक्त बहना, जैसे कि मसूड़ों या नाक से रक्त बहना।
 
रक्तस्राव।
 
आसानी से त्वचा में चोट लगना।
 
थोड़े समय के अन्तराल पर लगातार संक्रमण होना।
 
38 डिग्री सेल्सियस (100.4 एफ) या उससे अधिक तापमान (बुख़ार)।
 
अत्यधिक पसीना आना।
 
हड्डी और जोड़ों में दर्द।
 
वज़न में कमी।
 
बाद (क्रोनिक) के चरणों में निम्नलिखित लक्षण विकसित होते हैं:
 
संक्रमण (जो कि थोड़े समय के लिए दिखाई देता है)।
 
थकावट।
 
सांस लेने में तकलीफ़।
 
कमजोरी।
 
रात में पसीना आना।
 
असामान्य रक्तस्राव और चोट लगना।
 
स्प्लीन (प्लीहा) और लिम्फ नोड्स (लसीका ग्रंथियों) में सूजन।
 
संदर्भ: 
 

कारण
 
एक्यूट ल्यूकेमिया की शुरूआत सफ़ेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए उत्तरदायी स्टेम कोशिकाओं में पाए गए डीएनए की संरचना में उत्परिवर्तन से होती है। इसे आनुवंशिक उत्परिवर्तन के नाम से जाना जाता है।
 
क्रोनिक ल्यूकेमिया एक अर्जित आनुवांशिक रोग है। सामान्य रक्त कोशिकाएं अपने जीनों में परिवर्तन अर्जित करती हैं, जिससे सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है।
 
संदर्भ: 
 
 

निदान
 
सूक्ष्मदर्शी परीक्षण: सफ़ेद रक्त गणना असामान्य रूप से उच्च लिम्फोसाइट्स (सफ़ेद रक्त कोशिका का एक प्रकार) दिखाएगी।
 
अस्थि मज्जा (बोन-मेरो) बायोप्सी: एक्यूट ल्यूकेमिया के निदान की पुष्टि करने के लिए हेमटोलॉजिस्ट (रुधिर रोग विशेषज्ञ) माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर जांच करने के लिए अस्थि मज्जा (बोन-मेरो) का एक छोटा सा नमूना लेगा। इस प्रक्रिया को अस्थि मज्जा बायोप्सी के नाम से जाना जाता है।
 
साइटोगेनेटिक परीक्षण: साइटोगेनेटिक परीक्षण में कैंसर कोशिकाओं की अनुवांशिक संरचना का पता लगाना शामिल है।
 
सीटी स्कैन: यदि रोगी एक्यूट ल्यूकेमिया से पीड़ित है, तो कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी स्कैन (सीटी स्कैन) का उपयोग अन्य अंगों जैसे कि हृदय और फेफड़ों के स्वास्थ्य (ये अंग भली-भांति कार्य कर रहे है) की जांच के लिए किया जा सकता है।
 
लंबर पेंचर: यदि यह महसूस किया जाता है, कि इस तथ्य का ज़ोखिम है, कि एक्यूट ल्यूकेमिया तंत्रिका तंत्र में फैल गया है, तो एक लंबर पंचर किया जा सकता है।
 
यह केवल संकेतक जानकारी है।
 
कृपया अधिक जानकारी, निदान और उपचार के लिए चिकित्सक से संपर्क करें।
 
संदर्भ: 
 

प्रबंधन
 
 
एक्यूट लिम्फोसाईटिक ल्यूकेमिया का उपचार तीन चरणों में किया जाता है:
 
प्रारंभ- उपचार के प्रारंभिक चरण का उद्देश्य अस्थि मज्जा (बोन-मेरो) में ल्यूकेमिया कोशिकाओं को नष्ट करना है तथा पर्याप्त प्रक्रिया के लिए रक्त का पुन: निर्माण करना और किसी भी लक्षण को हटाना है। 
 
दृढ़ीकरण- इसका उद्देश्य किसी भी बची ल्यूकेमिया कोशिकाओं को नष्ट करना है, जो कि केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में उपस्थित हो सकती हैं।
 
रखरखाव- अंतिम चरण में ल्यूकेमिया को दोबारा लौटने से रोकने के लिए नियमित कीमोथेरेपी लेना शामिल है।
 
क्रोनिक (दीर्घकालिक) ल्यूकेमिया के लिए उपचार:
 
कीमोथेरेपी: यह विशेषकर क्रोनिक (दीर्घकालिक) मामलों में अत्यधिक प्रभावी पायी जाती है। ऐल्काइलीकारक (एल्किलिंग एजेंट) (साईक्लोफॉस्फोमाईड) के साथ फ्लुडरबिने का संयोजन एकल कारक (एजेंट) की तुलना में अधिक प्रतिक्रिया दर और लंबी उत्तरजीविता प्रदान करता है।
 
अस्थि मज्जा (बोन-मेरो) और स्टेम सेल प्रत्यारोपण: क्रोनिक लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया के लिए अस्थि मज्जा (बोन-मेरो) या स्टेम सेल प्रत्यारोपण करना एक अन्य विकल्प है।
 
यह केवल संकेतक जानकारी है।
 
कृपया अधिक जानकारी,निदान और उपचार के लिए चिकित्सक से संपर्क करें।
 
संदर्भ: 
 
 

जटिलताएं
 
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली एक्यूट ल्यूकेमिया की एक सामान्य जटिलता है। एक्यूट ल्यूकेमिया में व्यक्ति के रक्त में प्लेटलेट्स (क्लॉट/थक्का बनाने वाली कोशिकाओं) के निम्न स्तर के कारण खून बह सकता है तथा अधिक आसानी से चोट लग सकती है। अत्यधिक रक्तस्राव भी हो सकता है। क्रोनिक (दीर्घकालिक) लिम्फोसाईटिक ल्यूकेमिया की जटिलताएं।
 
रिक्टर सिंड्रोम: रिक्टर सिंड्रोम के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
 
आपके लिम्फ नोड्स (लसीका ग्रंथियों) में अचानक सूजन।
 
उच्च तापमान, जो कि संक्रमण के कारण नहीं होता है।
 
रात में पसीना आना।
 
वज़न में कमी।
 
पेट में दर्द।
 
संदर्भ: 
 

  • PUBLISHED DATE : Aug 13, 2018
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Aug 13, 2018

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