फाइलेरिया

परिचय
 
फाइलेरिया कई गोल, कुंडलित और धागे के समान परजीवी कृमि के कारण होता है जो कि 'फाइलेरिओडी परिवार' से संबंधित है। ये परजीवी त्वचा में या तो अपने आप प्रवेश कर जाते हैं या मच्छर के काटने से शरीर में प्रवेश करके लिम्फेटिक प्रणाली में पहुँच जाते है।
 
यह रोग नेमाटोड्स (सूत्रकृमि), या तो वुचेरिया बेंक्राफ्टी या ब्रुजिया मलेई के कारण होता है तथा क्रमशः मच्छर की प्रजाति क्यूलेक्स क्वीनक्वी फैसिएटस और मेनसोनिया एन्युलिफेरा/एम.यूनिफॉमिस द्वारा फैलता है।
 
आमतौर पर रोग पैरों की सूजन और हाइड्रोसील (जलवृषण) के साथ होता है तथा सामाजिक कलंक का कारण बनता है।
 
लिम्फेटिक फाइलेरियासिस (एलएफ) को सामान्यत: हाथी पांव (हस्तिपाद) के नाम से जाना जाता है। यह शरीर का रूप-सौंदर्य बिगाड़ने और विकलांग करने वाला रोग है। आमतौर पर यह बचपन में होता है। प्रारंभिक अवस्था में हालांकि या तो किसी भी तरह के लक्षण नहीं होते है या गैर-विशिष्ट लक्षण होते हैं, लेकिन लिम्फेटिक प्रणाली क्षतिग्रस्त हो जाती है। यह अवस्था कई वर्षों तक रहती है। संक्रमित व्यक्ति रोग के संचारण को बनाए रखता हैं। लंबे समय तक शारीरिक परिणाम के फ़लस्वरूप दर्दनाक सूजन युक्त अंग (लिम्फोएडेमा या हस्तिपाद) होते हैं। पुरुषों में भी हाइड्रोसील (जलवृषण) स्थानिक क्षेत्रों में सामान्य है।
 
एल एफ स्थिति
 
दुनिया भर में 52 देशों के 856 मिलियन लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं, जहां संक्रमण प्रसारण रोकने के लिए निवारक कीमोथेरेपी की आवश्यकता है। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र (सीईईएआर) में 9 देश एलएफ के लिए स्थानिक थे। मई 2016 में श्रीलंका और मालदीव आधिकारिक तौर पर 'फाइलेरिया मुक्त' घोषित होने वाले इस क्षेत्र के पहले देश बन गये है।
 
एलएफ भारत के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (संघ राज्य क्षेत्रों) के 256 जिलों में फैला है तथा वर्ष 2017 की स्थिति के अनुसार 630 मिलियन जनसंख्या स्थानिक जिलों में रहती है।
 
 
 
संदर्भ: 

लक्षण
 
लिम्फेटिक फाइलेरिया संक्रमण में स्पर्शोन्मुख, तीव्र और दीर्घकालिक स्थिति शामिल है। अधिकांश संक्रमण स्पर्शोन्मुख हैं, संक्रमण का कोई बाहरी लक्षण नहीं दिखता हैं, हालांकि रोगी का रक्त माइक्रोफिलारिया के लिए सकारात्मक है। यह अवस्था महीनों तक रह सकती है। 
 
स्थानीय सूजन के तीव्र प्रकरण में त्वचा, लिम्फ नोड्स (लसीका पर्व) और लसीका वाहिकाएं शामिल है। 
 
दीर्घकालिक स्थिति, मोटी त्वचा और अंतर्निहित ऊतकों (फाइलेरिया के पारम्परिक लक्षण) के साथ एडिमा/शोफ को दर्शाती है।
 
यह आमतौर पर निचले अंगों (हाथ-पैरों) को प्रभावित करता है। हालांकि, बाहें, योनिमुख (भग), स्तन और अंडकोष (हाइड्रोसील के गठन के कारण) भी प्रभावित हो सकते हैं। हाथ-पैर, स्तन या जननांग क्षेत्र में इडिमा/शोफ के परिणामस्वरूप इन अंगों का आकार सामान्य आकार की तुलना में कई गुणा बढ़ जाता है तथा यह लिम्फेटिक प्रणाली के वाहिकाओं में रुकावट के कारण होता है।
 
संदर्भ:

कारण
 
फाइलेरिया के अधिकांश मामले वुचेरिया बेंक्राफ्टी के नाम से जाने वाले परजीवी के कारण होते हैं। ‘क्यूलेक्स, एडीज और एनोफेलीज मच्छर’ रोग के संचारण में डब्ल्यू बेंक्राफ्टी के लिए वेक्टर के रूप में कार्य करते हैं। ब्रुजिया मलेई नामक अन्य परजीवी भी फाइलेरिया का कारण है जो कि वेक्टर मैनसनिया और एनोफेलीज मच्छरों द्वारा फैलता है।
 
जब संक्रमित मच्छर एक स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो लार्वा जिसे माइक्रोफ़िलारिया कहा जाता है, लिम्फेटिक और लिम्फ नोड्स में चला जाता है। यहां, वे वयस्क कृमि में विकसित होते हैं और वर्षों तक रह सकते हैं।
 
वयस्क परजीवी अधिक माइक्रोफिलारिया उत्पन्न करने में तब्दील हो जाते है। ये माइक्रोफ़ाइलेरिया परिधीय रक्त में सामान्यत: रात में फैलते हैं और काटने के दौरान मच्छरों द्वारा चूसे जाते हैं। यही चक्र एक और स्वस्थ व्यक्ति में दोहराया जाता है।
 
संदर्भ:

निदान
 
रक्त का नमूना:
 
माइक्रोफ़ाइलेरिया जो कि लिम्फेटिक फाइलेरिया का कारण है। यह रात में रक्त में फैलता है (जिसे रात्रि काल-चक्र कहा जाता है)। माइक्रोफ़िलारिया की उपस्थिति के लिए रक्त संग्रह रात के समय किया जाना चाहिए और एक मोटा स्मीयर बनाया जाना चाहिए तथा जिमसा या हेमैटोक्सिलीन और इओसिन के साथ धब्बा होना चाहिए। बढ़ी हुई संवेदनशीलता के लिए एकाग्रता तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
 
सीरोलॉजिकल परीक्षण
सीरोलॉजिकल तकनीक लिम्फेटिक फाइलेरिया के निदान के लिए माइक्रोफिलारिया की सूक्ष्म जांच का विकल्प प्रदान करती हैं। सामान्यत:सक्रिय फाइलेरिया संक्रमण से पीड़ित रोगियों के रक्त में एंटीफिलरियल आईजीजी4 का स्तर बढ़ जाता है और नियमित अरसे (जाँच) का उपयोग करके इसका पता लगाया जा सकता है।
 
क. बीनक्स नाउ फाइलेरिया एक इम्यून-क्रोमैटोग्राफी टेस्ट (आईसीटी) है, जिसका उपयोग रक्त, सीरम, प्लाज्मा में बेन्क्रॉफ्टाइ फाइलेरिया संक्रमण का पता लगाने के लिए किया जाता है। आईसीटी का सकारात्मक परिणाम वयस्क कृमि प्रतिजन की उपस्थिति इंगित करता है।
 
ख. फाइलेरिया टेस्ट स्ट्रिप (एफटीएस) देखभाल के नवीन दृष्टिकोण से त्वरित नैदानिक परीक्षण है। यह मानव रक्त में फाइलेरिया कृमि (वुचेरिया बेंक्राफ्टी) की प्रमुख प्रजातियों के प्रतिजन का पता लगाने के लिए विकसित किया गया है। एफटीएस का मूल्यांकन विभिन्न देशों में किया गया है तथा अब इसका उपयोग प्रतिचित्रण, निगरानी और मूल्यांकन गतिविधियों (डब्ल्यूएचओ, 2017) में किया जा रहा है।
 
ग. ब्रुजिया त्वरित परीक्षण- इस परीक्षण में बी मलेई और बी टिमोरी एंटीबॉडी का पता लगाने की क्षमता है। 
 
घ. नैदानिक परीक्षण डब्ल्यूएचओ-अनुशंसित संचारण मूल्यांकन सर्वेक्षण (टीएएस) के संचालन के लिए आवश्यक हैं, ताकि यह निर्धारित किया जा सके, कि संक्रमण लक्षित सीमा रेखा से कम हो गया है।
 
आगे के निदान के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें।
 
संदर्भ:

प्रबंधन
प्रभावित हिस्से की अच्छी स्वच्छता रखना लिम्फेडिमा और द्वितीयक जीवाणु त्वचा संक्रमण को खराब होने से रोकता है।
 
प्रभावित अंग को ऊंचा रखा जाना चाहिए तथा लिम्फ प्रवाह में बढ़ोत्तरी के लिए नियमित व्यायाम करना चाहिए।
 
फाइलेरिया के उपचार के लिए अनुशंसित उपचार व्यापक औषधि देना (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) है, जिसमें दो दवाओं की एक खुराक एक साथ दी जाती है– एल्बेंडाजोल (400 मिलीग्राम) या तो इवरमेक्टिन (150-200 एमसीजी/किग्रा) के साथ उन क्षेत्रों में जहां ऑन्कोसर्सियासिस (रिवर ब्लाइंडनेस) स्थानिक है या (ड़ाईथाइलकार्बामाज़ीन) साइट्रेट (डीईसी) (6 मिलीग्राम/kg) के साथ उन क्षेत्रों में जहां ऑन्कोसर्सियासि स्थानिक नहीं है। ये दवाएं रक्तप्रवाह से माइक्रोफिलेरिया को हटाती हैं। यद्यपि लिम्फेटिक फाइलेरिया का उपचार दवाओं से किया जाता है, लेकिन शरीर के अंगों में लगातार असामान्य वृद्धि होती है, जो कि दर्द और गंभीर विकलांगता का कारण बनती है। संबद्ध सामाजिक कलंक रोगियों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पीड़ित बनाता है। लिम्फेटिक फाइलेरिया का उन्मूलन व्यापक औषधि देना (एमडीए) के माध्यम से संक्रमण फैलाव रोककर तथा मच्छरों के काटने से बचाव एवं वेक्टर नियंत्रण उपायों द्वारा संभव है।
 
आगे के निदान के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें।
 
संदर्भ:

रोकथाम 
 
स्थानिक राज्यों/जिलों में लिम्फेटिक फाइलेरिया की रोकथाम और उन्मूलन के लिए व्यापक औषधि देना (एमडीए) प्रमुख रणनीति है। इसका उद्देश्य एलऍफ़ संचारण को बाधित करना है। प्रत्येक स्थानिक जिले को हर एमडीए दौर में 65% (विभाजक के रूप में केंद्र शासित प्रदेश/जिलों की कुल जनसंख्या के साथ गणना) के न्यूनतम उपचार कवरेज के साथ 5 वर्ष की अवधि में एमडीए (डीईसी+एएलबी) के कम से कम 5 चरणों से गुजरना चाहिए।
 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रणनीति 2 प्रमुख घटकों पर जोर देती है।
 
जहां संक्रमण उपस्थित है उन प्रदेशों या क्षेत्रों के सभी लोगों में व्यापक स्तर पर वार्षिक उपचार के माध्यम से संक्रमण फैलाव रोकना; तथा
 
लिम्फेटिक फाइलेरिया के कारण होने वाली पीड़ा को देखभाल के अनुशंसित आधारभूत पैकेज के प्रावधान के माध्यम से कम करना।
 
संदर्भ:

  • PUBLISHED DATE : Sep 06, 2019
  • PUBLISHED BY : NHP Admin
  • CREATED / VALIDATED BY : Sunita
  • LAST UPDATED ON : Sep 06, 2019

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