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मलेरिया

आमतौर पर भारत में तो दो प्रकार के मलेरिया मच्छर पाए जाते है :

  1. प्लॅस्मोडियम वीवेक्स
  2. पी. फल्सीपरूम

ये मादा मच्छर अनोफेलेस के काटने के कारण होता है, जो संचार प्रणाली में लार के माध्यम से प्रॉटिस्टा प्रवेश करता है|प्रॉटिस्टा रक्त के माध्यम से  जिगर में जाता है ओर वहाँ जाकर पूरण विक्सित ओर जनन होता है| मलेरिया में आमतौर पर  भूखार ओर सिरदर्द के लक्षण पाए जाते है, विकट स्तिथि में कोमा या मृत्यु हो सकती है| यह रोग ज़्यादातर सहारा अफ्रीका, एशिया के सहित भूमध्य रेखा के आसपास होता है|  मनुष्य एक संक्रामक मच्छर के द्वारा कटे जाने के 10 से 14 दिनों  के बाद रोग विकसित करता है| मलेरिया के निदान और इलाज ना होने पर यह घातक हो सकता है|

सन्दर्भ:
www.who.int
www.mrcindia.org
wwwnc.cdc.gov
nvbdcp.gov.in
www.youtube.com

संक्रमित मच्छरों के काटने के सात दिनों के बाद मलेरिया के लक्षण विकसित होते हैं।
इसके विशिष्ट लक्षणों में शामिल हैं:

  • बुख़ार, सिरदर्द, उल्टी तथा अन्य लक्षण जैसे कि फ्लू (बुख़ार चार से आठ घंटे के चक्र में होता है)।
  • परजीवी संक्रमित और लाल रक्त कोशिकाओं के नष्ट होने के परिणामस्वरूप बड़ी आसानी से थकान रहने की वज़ह से एनीमिया, दौरा / आक्षेप और चेतना की हानि होती है।
  • परजीवियों रक्त के माध्यम से मस्तिष्क (सेरिब्रल मलेरिया) और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों को पहुँच जाते है।
  • गर्भावस्था में मलेरिया गर्भवती, भ्रूण और नवजात के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है।
  • गर्भवती महिलाएँ मलेरिया के साथ मुकाबला करने , संक्रमण समाशोधन और प्रतिकूल रूप से अजन्मे भ्रूण पर प्रभाव को कम करने में सक्षम हैं।

संदर्भ :
http://www.nvbdcp.gov.in/malaria4.html
http://www.nvbdcp.gov.in/malaria.html

मलेरिया प्लाज्मोडियम परजीवी प्रजाति से संबंधित हैं। मनुष्य में मलेरिया का कारण पी. फाल्सीपेरम, पी.मलेरी, पी.ओवेल और पी.वैवाक्स है।
इन सब प्रजातियों में पी. फाल्सीपेरम और पी.वैवाक्स सबसे सामान्य प्रजातियां हैं लेकिन इनमें पी.फाल्सीपेरम सबसे ज़्यादा घातक है।

मलेरिया और इसका प्रसार
आमतौर पर प्लाज्मोडियम परजीवी मादा एनोफिलिस मच्छर द्वारा फैलता है जिसे रात में काटने वाले मच्छर के रूप में जाना जाता है। यह मच्छर सामान्यत: शाम और सुबह के बीच काटता है। यदि एक मच्छर मलेरिया से संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो वह स्वयं भी संक्रमित होगा और दूसरों में भी परजीवी को फैला सकता है। परजीवी मानव रक्त में प्रवेश कर यकृत में पहुँचता हैं। फिर से रक्त में प्रवेश करने और लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करने से पहले यकृत में संक्रमण विकसित हो जाता है।
परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में बढ़ने और दुगने होने लगते है। नियमित अंतराल पर, संक्रमित रक्त कोशिकाओं को तोड़कर, बहुत ज़्यादा परजीवी रक्त में चले जाते है। आमतौर पर संक्रमित रक्त कोशिकाएं हर अड़तालिस से बहत्तर घंटे में फटती है। हर बार इनके फटने पर बुख़ार, ठंड लगना और पसीना आता है।

गर्भावस्था और मलेरिया
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सिफारिश की है कि गर्भवती महिलाओं को उन (मलेरिया प्रभावित) क्षेत्रों की यात्रा करने से बचना चाहिए जहाँ मलेरिया का खतरा होता है।
गर्भवती महिलाओं को यदि संक्रमित मच्छर द्वारा काटा जाता है तो उनमें जटिलताओं के विकास का खतरा बढ़ जाता है।

संदर्भ :
http://www.nhs.uk/Conditions/Malaria/Pages/Causes.aspx
http://www.who.int/topics/malaria/en/

मलेरिया का निदान किया जा सकता है:
अनुवीक्षण परीक्षण (माइक्रोस्कोप इग्ज़ैमनेशन अर्थात् सूक्ष्मदर्शी से परीक्षण करना)
रक्त पट्टिकाओं का सूक्ष्मदर्शी से परीक्षण करना मलेरिया के निदान का सबसे वरीय और विश्वसनीय तरीका माना जाता है। इस परीक्षण से मलेरिया के चारों विशिष्ट परजीवियों को आसानी से प्रतिष्ठित किया जा सकता है।

इम्यूनो क्रोमेटोग्राफिक परीक्षण:
यह मलेरिया त्वरित निदान परीक्षण (मलेरिया त्वरित एंटीजन परीक्षण) के रूप में जाना जाता है।
इस प्रतिजन आधारित जाँच (एण्टीजन कैप्चर असे) या डिपस्टिक परीक्षण का विकास और वितरण प्रभावित क्षेत्रों की जाँच (फील्ड जाँच) में किया जाता है।
इन परीक्षणों में उंगली से रक्त (फिंगगर स्टिक) या शिरापरक रक्त की एक बून्द लेकर परीक्षण किया जाता है। इस परीक्षण में कुल पन्द्रह से बीस मिनट का समय लगता है और डिपस्टिक की रंगीन पट्टिका पर उपस्थिति और अनुपस्थिति का परिणाम स्पष्ट देखा जा सकता है। इस तरह के परीक्षण का उपयोग प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं।
रैपिड निदान परीक्षण (त्वरित निदान परीक्षण) द्वारा रोग का पता लगाने की सीमा सौ परजीवी / μl (म्यो लीटर) खून है (वाणिज्यिक किट की लगभग सीमा 0.002% से 0.1% पेरासाइटिमिया तक हो सकती है)
डिपस्टिक परीक्षण का नुकसान यह है कि यह परीक्षण गुणात्मक हैं, लेकिन परिमाणात्मक नहीं है अर्थात् यदि परजीवी रक्त में मौजूद हैं तो यह निर्धारित किया जा सकता है परंतु संख्या स्पष्ट नहीं की जा सकती है।


आण्विक पद्धतियाँ (मौलिक्यूलर पद्धतियाँ) :
आण्विक पद्धतियाँ (मौलिक्यूलर पद्धतियाँ) कुछ नैदानिक प्रयोगशालाओं और त्वरित वास्तविक-समय जाँच के लिए उपलब्ध हैं (उदाहरण के लिए पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर)) जिसे स्थानिक क्षेत्रों में प्रसारित करने की उम्मीद के साथ विकसित किया जा रहा है।
पीसीआर (तथा अन्य आणविक पद्धतियाँ) माइक्रोस्कोपी तुलना में ज़्यादा सटीक है।
एनएचपी स्वास्थ्य की बेहतर समझ के लिए सांकेतिक जानकारी प्रदान करता है।
किसी भी तरह के निदान और उपचार के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

संदर्भ:
www.nhs.uk
www.cdc.gov

(क) कीट प्रजनन पर नियंत्रण (कंट्रोल इंसेक्ट ब्रीडिंग) (लार्वा और प्यूपा के चरण पर)

  • सभी प्रजनन अर्थात् मच्छर पनपने वाले जगहों को भरा और ढंका  जाएं।
  • संग्रहित पानी को हमेंशा ढंक कर रखें, टायरों,बर्तनों, कूलरों और टैंकों में पानी का संग्रह न करें तथा उनकी सफ़ाई क्लोरीन या टैम्फोस से सप्ताह में एक बार अवश्य करें।
  • मच्छरों के प्रजनन स्रोतों  को समाप्त करना।
  • सजावटी जलजीवालय (अक्वेरियम), फ़व्वारों एवं अन्य जगहों पर लार्वा खाने वाली मछलियों जैसे कि गैम्बुसिया या गप्पी का उपयोग करें।
  • रासायनिक लार्वानाशकों जैसेकि एबेट का उपयोग पीने योग्य पानी में करें।


(ख)   वैयक्तिक रोकथाम

  • जब भी सोएं उपचारित मच्छरदानी का उपयोग करें।
  • मच्छर दूर भागने वाली क्रीम, तरल पदार्थ, मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती और रासायनिक रूप से उपचारित की गई चटाई का उपयोग करें।
  • कीटनाशकों के साथ घर के भीतर बाक़ी छिड़काव (आईआरएस) का उपयोग करें।
  • दिन में एयरोसोल (वतिलयन) स्प्रे का उपयोग करें।
  • जैवनाशी का उपयोग करें।
  • घरों में तार की जाली लगाएं।
  • कीटनाशकों के साथ मच्छरदानी का उपयोग योग करें।
  • शरीर के सभी हिस्सों को कपड़ों से ढंक कर रखें।
  • डीईईटी (डाईथोलटोमाइड) युक्त कीट से बचाने वाली क्रीम का उचित उपयोग करें।
  • शाम और रात के समय जब मच्छर काटने का खतरा अधिक होता है तब दरवाजें और खिड़कियां ठीक से बंद करें।


(ग) समुदाय में मलेरिया की रोकथाम

  • प्रकोप के दौरान मेलाथियान का छिड़काव (फॉगिंग) करना।
  • हाथ पम्प (हैंड पम्प) के आसपास की जगह और जल निकासी की व्यवस्था को सीमेंट से पक्का किया जाना चाहिए।
  • एनोफ़ेलीज़ मच्छर के प्रजनन के स्थलों का पता लगाने और उनके उन्मूलन के प्रति संवेदनशील बनकर समुदाय से जुड़े।


(घ) यात्रा के दौरान रोकथाम

  • यदि आप किसी विशेष क्षेत्र में मलेरिया के ख़तरे का पता लगाने के लिए यात्रा करने का विचार कर रहे है तो उस क्षेत्र की यात्रा करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
  • यदि आप मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में यात्रा कर रहे है तो अपने साथ मलेरिया विरोधी गोलियां ज़रूर ले जाएं।


(ङ ) गर्भावस्था के दौरान रोकथाम

  • मच्छरदानी/ एलएलआईएनस (मच्छर नाशक दवाई युक्त मच्छरदानी अर्थात् रासायनिक रूप से उपचारित मच्छरदानी) का उपयोग करना।
  • उपरोक्त व्यक्तिगत मलेरिया रोकथाम के सभी सभी उपाय/साधन बताएं गए है।


मलेरिया की रोकथाम के लिए वीडियो गैलरी:
https://www.youtube.com/watch?v=h8TdV3q4C1k
https://www.youtube.com/watch?v=0xSUITkRvbA
https://www.youtube.com/watch?v=G9Sviuz3wgE
https://www.youtube.com/watch?v=9GxxkjhPp2s

संदर्भ : www.nvbdcp.gov.in
          www.nhs.uk

मलेरिया एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, यदि इसका निदान और उपचार न किया जाएं तो यह घातक (जानलेवा) हो सकती है। मलेरिया का सबसे गंभीर लक्षण और अधिकांश मौतें फाल्सीपेरम परजीवी के कारण होती है।

एनीमिया:
मलेरिया परजीवी द्वारा लाल रक्त कोशिकाओं का विनाश गंभीर एनीमिया का कारण बनता है। एनीमिया की स्थिति में लाल रक्त कोशिकाएं पर्याप्त ऑक्सीजन शरीर की मांसपेशियों और अंगों तक पहुँचाने में असमर्थ होती हैं, आप सुस्त, कमज़ोर और बेहोशी महसूस करते हो।

सेरेब्रल मलेरिया (दिमागी या  प्रमस्तिष्कीय मलेरिया) :
सेरेब्रल मलेरिया की जटिलताओं को सामान्यतः पूर्वोत्तर राज्यों में  देखा गया है। यह आम तौर पर मस्तिष्क को प्रभावित और क्षति पहुँचाने का कारण है, इसकी वज़ह से कभी-कभी मस्तिष्क को स्थायी (ब्रेन डैमेज) क्षति पहुँचती है।

अन्य जटिलताएं :
गंभीर मलेरिया की वजह से होने वाली अन्य जटिलताओं में शामिल हैं:

  • सांस लेने में तकलीफ़, जैसे कि फेफड़ों में द्रव होना
  • यकृत की असफलता (फ़ेल) और पीलिया (त्वचा का पीलापन और आँखों का सफ़ेद पड़ना)
  • आघात अर्थात् दौरा (मूत्र में रक्त का क़तरा बहना)
  • स्वतः खून बहना
  • असामान्य रूप से ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) कम होना
  • गुर्दे की विफलता (किडनी फ़ेल होना)
  • सूजन और तिल्ली की टूट जाना
  • निर्जलीकरण (शरीर में पानी की कमी)


संदर्भ : www.nhs.uk

एंटी मलेरिया (मलेरिया-रोधी), रोकथाम या दवा (औषधि) के लिए अभिकल्पित किया गया है दवाएं जैसे कि :

कुनैन तथा उससे संबंधित (एजेंटस)

  • क्लोरोक्वीन
  • अमोडियाकिन
  • पाइरिथामाइन
  • प्रोगोनिल
  • संफोनामाइड्स
  • मैफलोकिन
  • अटावोकोंन
  • प्राइमाकिन
  • आर्टीमिसिनिन और डेरिवेटिव (व्युत्पन्न)
  • हैलोफैंट्राईन
  • किलिंडमाइसिन

तीव्र नैदानिक परीक्षण (रैपिड निदान परीक्षण) के उपरांत सम्पूर्ण उपचार किया जाता है।
किसी भी तरह के निदान और उपचार के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

संदर्भ: www.mrcindia.org
 

  • PUBLISHED DATE : May 18, 2015
  • PUBLISHED BY : NHP CC DC
  • CREATED / VALIDATED BY : NHP Admin
  • LAST UPDATED ON : Jun 04, 2015

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