Tuberculosis.png

क्षय रोग

क्षय रोग विभिन्न प्रकार के माइकोबैक्टीरियम के कारण होता है । क्षय रोग आमतौर पर फेफड़ों में फैलता है, पर ये शरीर के अन्य भागों को प्रभावित कर सकता है । टीबी संक्रमण संक्रमित लोगों के खांसने , छींक, या सांस से फैलता है । यह एक गंभीर रोग है, लेकिन उचित उपचार से इसे ठीक किया जा सकता है । विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के 2011 के आकड़ो के अनुसार विश्व के कुल 84 लाख टी.बी. के मामलों में भारत में 22 लाख मामले पाए गए हैं ।

सक्रिय तपेदिक से पीड़ित रोगियों को पूरक पोषक आहार से उपचारित किया जाता है।
एक अध्ययन में तपेदिक और कुपोषण के बीच सम्बन्ध पाया गया है। यह कहा गया था कि संक्रमण में पूरक पोषक आहार के अंतर्गत उच्च चयापचय की मांग और सेवन में कमी की अगुवाई हो सकती है।
शोध पद्धति (कोक्रेन पुस्तकालय) को केंद्रीय समीक्षा द्वारा, मेडलाइन, एमबेस, लाइलक्स, एमआरसीटी, और क्षय रोग इंडियन जर्नल जुलाई 2011 तक शामिल किया गया था।
अनियमित नियंत्रित परीक्षण (आरसीटीएस) द्वारा संचालित अध्ययन के अनुसार जिसमें मौखिक पूरक पोषण आहार किसी पूरक पोषण आहार के व्यवधान के साथ,प्लेसबो चार सप्ताह तक दिया जाता था या सक्रिय तपेदिक के उपचार के लिए लोगों को केवल आहार सलाह दी जाती है। तेईस परीक्षणों में छह हज़ार चार सौ बयालीस प्रतिभागियों शामिल थे।
लेखक ने यह निष्कर्ष निकाला है कि अपर्याप्त अनुसंधान यह जानने के लिए काफ़ी है कि चाहे नियमित रूप से नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराने या तपेदिक के बेहतर उपचार में ऊर्जादायक पोषक आहार के परिणाम का नतीज़ा या जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता हैं।
आगे के परीक्षण पर्याप्त नमूनों के आकार के साथ पहचान या निकालने, चिकित्सकीय महत्वपूर्ण लाभ के लिए किया जाना चाहिए।
 

http://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/14651858.CD006086.pub3/abstract 

सन्दर्भ:   www.tbcindia.nic.in
              www.cdc.gov
              www.who.int
              www.who.int/tb/en/ 
              www.youtube.com

आमतौर पर क्षय रोग सबसे अधिक फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसमें निम्नलिखित लक्षण शामिल हैं:-

  1. दो सप्ताह से अधिक लगातार खांसी कफ (श्लेष्मा) पैदा करती है।
  2. आमतौर पर साँस लेने में कठिनाई (तकलीफ़) की शुरुआत हल्की होती है लेकिन धीरे-धीरे अधिक बढ़  जाती है।
  3. वजन में कमी या भूख न लगना।
  4. उच्च तापमान 38 डिग्री सेल्सियस (100.4 फेरनहाइट) या इससे अधिक हो सकता हैं।
  5. अत्यधिक थकावट या थकान होना
  6. तीन सप्ताह से अधिक अस्पष्टीकृत दर्द होने पर टीबी पूरी तरह शरीर के अन्य अंगों में फैल सकता है जिनमें निम्न शामिल है:-
  7. लिम्फ नोड्स (लसीका नोड टीबी)
  8. हड्डियों और जोड़ों (कंकाल टीबी)
  9. पाचन तंत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल या जठरांत्र टीबी)
  10. तंत्रिका तंत्र (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र टीबी)

संदर्भ:  www.nhs.uk

टीबी का मुख्य कारण माइकोबैक्टीरियम क्षयरोग, छोटा सा एक एरोबिक, गैर गतिशील बेसिलस है। सक्रिय टीबी संक्रमण से ग्रसित व्यक्ति के फेफड़ों, खांसी या छींक से टीबी का प्रसार होता है और किसी अन्य टीबी बैक्टीरिया युक्त निष्कासित बूंदों को साँस में लेने से होता है।

जोखिम के कारक : दुनिया भर में टीबी के साथ जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण जोखिम का कारक एचआईवी है।

अन्य कारकों में शामिल हैं:

  1. हॉजकिन्स लिंफोमा
  2. वृक्क रोग अंत मंच में (गुर्दे की बीमारी अंतिम चरण में)
  3. फेफड़ों के पुराने रोग
  4. कुपोषण
  5. (ऐल्कहॉलिज़म) मदात्यय

संदर्भ: www.cdc.gov

निदान :  तपेदिक (टीबी) के सामान्य लक्षण दो सप्ताह से अधिक खांसी, वजन में कमी, भूख न लगना, ज़्वर, रात को पसीना में और थकावट हैं। यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण पाये जाते है तो क्या यह तपेदिक है? कि क्या जांच करने के लिए चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

  • छाती का एक्स-रे : विकिरण का उपयोग फेफड़ों की छवि (एक्स-रे चित्र) बनाने के लिए किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति को टीबी का संक्रमण है, तो उसके फेफड़ों के स्वरुप में परिवर्तन आएगा जैसे कि एक्स-रे में (स्कार) निशान दिखाई देगा।
  • बैक्टीरिया की उपस्थिति का पता लगाने के लिए श्लेष्मा (चिपचिपा) और कफ (बलगम) के नमूनों की जाँच की जाती है। फेफड़ों संबंधी अतिरिक्त जाँच के लिए शामिल हैं :
  • कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी (कम्प्यूटराइज्ड टोमोग्राफी) (सीटी) स्कैन: शरीर का श्रृंखलाबद्ध (सीरीज) एक्स-रे विभिन्न कोणों से लिया जाता है और कंप्यूटर शरीर के भीतर के विस्तृत चित्रों का ब्योंरा निर्मित करता है।
  • चुंबकीय (मैग्नेटिक) अनुनाद इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन: शरीर के भीतर की विस्तृत इमेंज (चित्रों) के लिए चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटिक फ़ील्ड) और रेडियो तरंगों का उत्पन्न किया जाता है।
  • अल्ट्रासाउंड स्कैन (पराध्वनि परीक्षण) : उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगें शरीर के भीतरी हिस्सों के चित्र बनाती है।
  • रक्त परीक्षण
  • मूत्र परीक्षण
  • बायोप्सी: प्रभावित हिस्से से ऊतक का छोटा सा नमूना लिया जाता है तथा रोग की उपस्थिति का परीक्षण किया जाता है।

संदर्भ :  www.tbdots.com 
            www.nhs.uk

क्षय रोग (टीबी) का उपचार इस पर निर्भर करता है कि आपको किस स्तर (टाइप) का क्षय रोग (टीबी) है यद्यपि अक्सर लंबी अवधि तक इस्तेमाल की जाने वाली (लांग टर्म कोर्स) एंटीबायोटिक दवाओं उपयोग किया जाता है।
डॉट्स (प्रत्यक्ष उपचार का अवलोकन, लघु कोर्स (एक निश्चित समय सीमा में दवाइयों का क्रमबद्ध सेवन) ) प्रत्यक्ष रूप से दी जाने वाली चिकित्सा, अर्थात् एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इस बात का ध्यान रखता है कि लोग अपनी दवायें लें। इस तरह की चिकित्सा की डब्ल्यूएचओ द्वारा सिफारिश की गयी है जो उन लोगों की संख्या को घटाने का प्रयास है जो अपनी दवाओं को नियमित तौर पर नहीं लेते हैं। 2010 में, नये शुरु हुये फुफ्फुसीय तपेदिक (फेफड़ों से संबंधी तपेदिक)  के बताए गए छः मास के उपचार में पहले दो माह तक रिफैम्पिसिन, आइसोनियाज़िड,पाइराज़िनामाइड और एथेमब्यूटॉल जैसी एंटीबायोटिक के संयोजनों का उपयोग किया जाता है तथा बाद के चार माह में केवल रिफैम्पिसिन और आइसोनिज़िड का उपयोग किया जाता है, जिन मामलों में आइसोनियाज़िड का प्रतिरोध उच्च होता है, उनमें बाद के चार माह एथेमब्यूटॉल को विकल्प के रूप में जोड़ा जा सकता है, जो एक से अधिक प्रतिरोधी टीबी दवाओं (एमडीआर-टीबी) का पता चला है इसलिए 18 से 24 महीनों तक कम से कम चार प्रभावी एंटीबायोटिक दवाओं के साथ उपचार की सिफारिश की जाती है।

संदर्भ :  www.nhs.uk 
             www.cdc.gov

तपेदिक (टीबी) की रोकथाम टीकाकरण के माध्यम से होती है। वर्ष 2011 में एकमात्र उपलब्ध वैक्सीन बैसिलस काल्मेट-गुएरिन (बीसीजी) है, जो कि बचपन में फैले रोग पर प्रभावी है और फेफड़ों की टीबी (फुफ्फुसीय तपेदिक) के विरुद्ध असंगत संरक्षण प्रदान करती है।

संदर्भ: www.nhs.uk

  • PUBLISHED DATE : May 19, 2015
  • PUBLISHED BY : NHP CC DC
  • CREATED / VALIDATED BY : NHP Admin
  • LAST UPDATED ON : Jul 04, 2015

Discussion

Write your comments

This question is for preventing automated spam submissions
The content on this page has been supervised by the Nodal Officer, Project Director and Assistant Director (Medical) of Centre for Health Informatics. Relevant references are cited on each page.